अनूपपुर: अदाणी पावर की प्रस्तावित रेलवे कॉरिडोर की जनसुनवाई पर ग्रमीणों ने बाहर रखने का लगाया आरोप
अनूपपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अनूपपुर थर्मल एनर्जी (म.प्र.) प्राइवेट लिमिटेड (अदाणी पावर) की शुक्रवार काे छतई, मझटोलिया और उमरदा ग्राम में 4x 800 मेगावाट कोयला आधारित अल्ट्रा सुपर थर्मल पावर प्लांट के स्थापना में प्रस्तावित रेलवे कॉरिडोर परियोजना का भू-अर्जन सम्बन्धित लोक सुनवाई जनसुनवाई विवादों के घेरे में आ गई है।
आरोप है कि इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई में उन गांवों के ग्रामीणों को ही शामिल नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर इस परियोजना से प्रभावित होने वाले हैं। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इसे जनसुनवाई के नाम पर औपचारिकता मात्र करार दिया है। इस दौरान ग्रमीणों के विरोध के कारण कुर्सीया खाली रहीं।
जिले के कोतमा तहसील अन्तर्गत आठ ग्रामों कटकोना, बैहाटोला, मैनटोला, डोंगरिया खुर्द, भाटाडांड़, कोरिया खुर्द, कोठी एवं तरसिली में रेलवे कॉरिडोर निर्माण हेतु कुल 89. 917 हेक्टेयर निजी भूमि का अर्जन हेतु ग्राम बैहाटोला स्थित शासकीय उच्च विद्यालय में लोक सुनवाई में भूमि अर्जन पुर्नवास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों तहत किये जा रहे भूमि अर्जन पर ग्रामीणों ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य प्रभावित लोगों की समस्याओं, आपत्तियों और सुझावों को सुनना होता है, लेकिन यहां उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी रहीं। प्रभावित किसानों व ग्रामीणों को न तो सही जानकारी दी जा रही है और न ही उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला है।
जनसुनवाई में प्रशासन टी आर नाग एसडीम, दशरथ सिंह तहसीलदार, विकास सिंह थाना प्रभारी बिजुरी और संबंधित कंपनी के अधिकारी तो मौजूद रहे, लेकिन जिन ग्रामीणों की जमीन, आजीविका और भविष्य इस परियोजना से प्रभावित होगा, उनकी अनुपस्थिति ने पूरी प्रक्रिया की वैधता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि बिना उनकी सहभागिता के की गई कोई भी जनसुनवाई लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। आरोप लगाया कि जानबूझकर सूचना का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, ताकि प्रभावित लोग समय पर जनसुनवाई में न पहुंच सकें। इसे प्रशासन और कंपनी की मिलीभगत बताते हुए ग्रामीणों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनः जनसुनवाई आयोजित कर प्रभावित गांवों के लोगों को शामिल नहीं किया गया, तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह संघर्ष अपनी जमीन, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए है, जिसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता। जनआक्रोश आने वाले दिनों में एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

