अनूपपुर: हाईकोर्ट के नाम पर फर्जी आदेश प्रस्तुत कर आरोपी को दिलाई जमानत, न्यायालय के निर्देश पर एफआईआर दर्ज

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अनूपपुर: हाईकोर्ट के नाम पर फर्जी आदेश प्रस्तुत कर आरोपी को दिलाई जमानत, न्यायालय के निर्देश पर एफआईआर दर्ज


अनूपपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पिता की जमानत कराने के लिए पुत्र के द्वारा उच्च न्यायालय का एक कूट रचित आदेश प्रस्तुत करते हुए पुत्र के द्वारा जालसाजी किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायालय के निर्देश पर रामनगर पुलिस ने कूट रचना का मामला दर्ज करते हुए इसकी जांच प्रारंभ कर दी है।

रामनगर थाना प्रभारी सुमित कौशिक ने गुरुवार को बताया कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री कृष्ण डागलिया के न्यायालय के द्वारा रामनगर पुलिस को अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। मामले के बारे में बताया गया कि न्यायालय में लंबित एस.सी.ए.टी.आर. प्रकरण क्रमांक 50/24 (शासन बनाम शिवविशाल नामदेव) की सुनवाई के दौरान 16 दिसंबर 2024 को अभियुक्त शिव विशाल नामदेव के पुत्र ओमप्रकाश नामदेव के द्वारा एक आदेश उच्च न्यायालय का बताकर प्रस्तुत किया गया था। जब इस आदेश की सत्यता के संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से जानकारी मांगी गई, तब सहायक रजिस्ट्रार, जबलपुर द्वारा स्पष्ट किया गया कि संबंधित आदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित ही नहीं किया गया था। इसके बाद न्यायालय ने पूरे मामले की अलग से जांच कराई।

जांच के दौरान शासकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला फुनगा के प्रभारी प्राचार्य सुखदेव सिंह तथा मलगा विद्यालय की प्रधानाध्यापक शकुन्तला सिंह मार्को के बयान दर्ज किए गए। जांच में सुखदेव सिंह ने फर्जी आदेश की मूल प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह दस्तावेज दो व्यक्तियों द्वारा स्कूल में लाकर दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी ओमप्रकाश नामदेव ने आदेश मिलने से दो-तीन दिन पहले ही उन्हें कहा था कि हाईकोर्ट से पुनः जांच का आदेश आने वाला है, जिसे प्राप्त कर लेना।

न्यायालय ने जांच के आधार पर माना कि ओमप्रकाश नामदेव एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से उच्च न्यायालय का कूटरचित आदेश तैयार कर उसका उपयोग किया गया। आदेश में शासकीय शिक्षकों के अवकाश एवं सेवा संबंधी अधिकारों को प्रभावित करने वाले निर्देश भी शामिल थे।

न्यायालय के निर्देश पर थाना रामनगर पुलिस ने आरोपी ओमप्रकाश नामदेव एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 336(2), 337, 338, 339 एवं 340(2) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच करते हुए इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जाए। साथ ही विवेचना की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तथा तृतीय अपर सत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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