निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक का अभाविप ने किया विरोध, कहा- शिक्षा के व्यापारीकरण को मिलेगा बढ़ावा

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निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक का अभाविप ने किया विरोध, कहा- शिक्षा के व्यापारीकरण को मिलेगा बढ़ावा


जबलपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 का कड़ा विरोध जताया है। परिषद का कहना है कि यह संशोधन उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय शिक्षा के बाजारीकरण और निजी व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देगा।

रविवार को अभाविप ने जारी बयान में कहा कि विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित आवश्यक मानकों में ढील देने से मनमानी, भ्रष्टाचार और पक्षपात की आशंका बढ़ेगी। परिषद का मानना है कि शिक्षा व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है और इसके मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

परिषद के अनुसार, मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007 की धारा-7 के तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि का प्रावधान है। साथ ही, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भी पर्याप्त भूमि और आवश्यक अधोसंरचना को विश्वविद्यालय स्थापना की अनिवार्य शर्त मानता है।

अभाविप ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने प्रो. यशपाल बनाम छत्तीसगढ़ (2005) तथा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी (2025) के मामलों में स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय केवल कागजी स्वीकृति से स्थापित नहीं हो सकता, बल्कि उसके लिए पर्याप्त भूमि, समुचित परिसर और आवश्यक शैक्षणिक अधोसंरचना अनिवार्य है। ऐसे में विधेयक में पर्याप्त भूमि जैसे अस्पष्ट प्रावधान शामिल किए जाने से भविष्य में नियमों की मनमानी व्याख्या, वैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

अभाविप ने कहा कि वह शुरू से ही शिक्षा के बाजारीकरण का विरोध करती रही है और शिक्षा को सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण का माध्यम मानती है। परिषद का कहना है कि उच्च शिक्षा का विस्तार आवश्यक है, लेकिन यह गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों से समझौता करके नहीं किया जाना चाहिए। निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने से अधिक महत्वपूर्ण उनकी गुणवत्ता, शोध संस्कृति और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि 'पर्याप्त भूमि' जैसे अस्पष्ट प्रावधान भविष्य में शिक्षा के व्यापारीकरण और निजी हितों को बढ़ावा दे सकते हैं। शिक्षा को बाजार की वस्तु नहीं बनाया जा सकता। उच्च शिक्षा में सुधार का आधार गुणवत्ता, पारदर्शिता और विद्यार्थियों का हित होना चाहिए, न कि व्यावसायिक लाभ। उन्होंने कहा कि अभाविप इस प्रस्तावित संशोधन विधेयक का स्पष्ट और दृढ़तापूर्वक विरोध करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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