उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ का दिखा अलग नजारा, पर्यटक हुए रोमांचित
उमरिया, 05 जनवरी (हि.स.)। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व आए दिन किसी न किसी बात पर सुर्खियों में बना ही रहता है, कभी बाघ की मौत तो कभी इंसान की मौत, कभी हाथियों का आतंक, कभी अवैध शिकार, कभी बाघों का मनमोहक नजारा तो कभी हाथियों की जल क्रीड़ा ऐसे ही बहुत से नजारे जो सैलानियों का मन मोह लेते हैं। उसी तरह इन दिनों सोशल मीडिया में एक बाघ की अजीब क्रिया तेजी से वायरल हो रही है जिसको देख सभी आश्चर्य चकित हैं कि आखिर यह बाघ क्या कर रहा है।
इस बारे में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र संचालक डाक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि यह एक फ्लेहमेन प्रतिक्रिया है जिसका वर्णन सबसे पहले फ्रेडरिक रुइश ने 1732 में किया था और बाद में लुडविग जैकबसन ने 1813 में इसका वर्णन किया।
इस प्रतिक्रिया में जानवर अपने ऊपरी होंठ को पीछे की ओर मोड़कर सामने के दांत और मसूड़े दिखाता है, फिर सांस लेता है और कुछ सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहता है।
यह व्यवहार किसी विशेष स्थान पर किया जा सकता है, ऐसे में जानवर उस स्थान को चाट भी सकता है या फिर स्वाद से संबंधित किसी सामान्य जांच के लिए गर्दन को फैलाकर और सिर को ऊपर उठाकर फ्लेहमेन क्रिया कर सकता है।
फ्लेहमेन प्रतिक्रिया से ऐसा लग सकता है कि जानवर द्वेषपूर्ण मुंह बना रहा है, मुस्कुरा रहा है, घृणा कर रहा है या हंस रहा है। विभिन्न प्रजातियों में भावनाओं और भावों के बीच संबंध पर अभी भी विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है।
फ्लेहमेन प्रतिक्रिया वोमेरोनैसल अंग (VNO) में हवा खींचती है, जो कई जानवरों में पाया जाने वाला एक सहायक घ्राण संवेदी अंग है। यह अंग कुछ गंधों और फेरोमोनों की अनुभूति में भूमिका निभाता है। वोमेरोनैसल अंग का नाम वोमर और नासिका हड्डियों के निकट होने के कारण रखा गया है और यह बिल्लियों और घोड़ों जैसे जानवरों में विशेष रूप से विकसित होता है। VNO एक अस्थि या उपास्थि कैप्सूल के भीतर स्थित होता है जो नामिता गटा के आधार में खुलता है।
गौरतलब है कि बांधवगढ़ में यह प्रक्रिया बाघ में नजर आई और कैमरों में कैद हो गई जो सोशल मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

