सिवनी: तराई के दौरान धंसा नया कुआं, मलबे में दबीं मां-बेटी की मौत, रातभर चले रेस्क्यू में निकाले गए शव

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सिवनी: तराई के दौरान धंसा नया कुआं, मलबे में दबीं मां-बेटी की मौत, रातभर चले रेस्क्यू में निकाले गए शव


सिवनी: तराई के दौरान धंसा नया कुआं, मलबे में दबीं मां-बेटी की मौत, रातभर चले रेस्क्यू में निकाले गए शव


सिवनी, 02 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बंडोल थाना क्षेत्र के ग्राम दुकली में सोमवार शाम एक निर्माणाधीन कुएं की तराई के दौरान अचानक उसकी सीमेंट रिंग और दीवार धंस गई, जिससे एक ही परिवार की तीन महिलाएं मलबे में दब गईं। हादसे में मां और बेटी की मौत हो गई, जबकि बुजुर्ग महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देर रात तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रशासन ने मां-बेटी के शव कुएं से बाहर निकाले।

जानकारी के अनुसार, 75 वर्षीय समानिया बाई जंघेला अपनी 41 वर्षीय बेटी अनुसुइया जंघेला और 17 वर्षीय नातिन स्वाति जंघेला के साथ सोमवार दोपहर करीब चार बजे नए बने कुएं की तराई करने पहुंची थीं। इसी दौरान अचानक कुएं की दीवार और सीमेंट रिंग का बड़ा हिस्सा धंस गया। देखते ही देखते तीनों महिलाएं मलबे के साथ कुएं में समा गईं। ग्रामीणों के मुताबिक जंघेला परिवार ने करीब एक माह पहले अपने खेत के पास घर से लगभग 400 मीटर दूर नया कुआं बनवाया था। हाल ही में कुएं में सीमेंट की रिंग और दीवार का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसकी मजबूती के लिए तराई की जा रही थी। इसी दौरान यह हादसा हो गया।

स्थानीय निवासी पुरुषोत्तम डेहरिया ने बताया कि कुएं के चार गोलाकार हिस्सों में से तीन हिस्से अचानक एक साथ धंस गए। भारी सीमेंट रिंग फिसलकर अनुसुइया और स्वाति के ऊपर आ गिरी, जिससे दोनों मलबे में दब गईं। हादसा इतना अचानक हुआ कि महिलाओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद बचाई गई समानिया बाई ने ग्रामीणों को बताया कि सबसे पहले उनकी नातिन स्वाति का संतुलन बिगड़ा और वह नीचे जा गिरी। उसे बचाने के प्रयास में बेटी अनुसुइया भी कुएं में समा गई। इसके बाद मिट्टी और रिंग धंसने से वह स्वयं भी मलबे में दब गईं। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और किसी तरह समानिया बाई को बाहर निकाल लिया। उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

100 से अधिक ग्रामीण बचाव कार्य में जुटे

हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर 100 से अधिक लोग राहत एवं बचाव कार्य में जुटे थे। कुएं की दीवार लगातार खिसक रही थी, जिससे बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। ग्रामीण पुरुषोत्तम डेहरिया ने बताया कि आम के पेड़ से रस्सियां बांधकर लोग कुएं में उतरे और मलबे में फंसी महिलाओं को निकालने का प्रयास किया। हालांकि लगातार धंसती मिट्टी और भारी सीमेंट रिंग के कारण रेस्क्यू में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

सूचना मिलते ही बंडोल पुलिस, राजस्व अमला और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। प्रभारी कलेक्टर अनिल राठौर, पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी तथा एसडीओपी सचिन परते ने घटनास्थल का निरीक्षण कर बचाव कार्य की निगरानी की। मलबे को हटाने के लिए दो जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद ली गई। घंटों की मशक्कत के बाद देर रात करीब एक बजे अनुसुइया जंघेला का शव कुएं से बाहर निकाला गया। इसके लगभग एक घंटे बाद उनकी बेटी स्वाति का शव भी बरामद कर लिया गया। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

गांव में पसरा मातम

हादसे में मां-बेटी की मौत से पूरे दुकली गांव में शोक की लहर है। स्वाति ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी । एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों के एक साथ हादसे का शिकार होने से ग्रामीण स्तब्ध हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी खामी अथवा मिट्टी धंसने को हादसे की वजह माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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