उज्जैन : इंजीनियर संत बनने के बाद 27 जनवरी को अपने गृह नगर उज्जैन आएंगे



उज्जैन, 24 जनवरी (हि.स.)। शहर के ख्याति प्राप्त इंजीनियर महेंद्र सिरोलिया वर्ष-2020 में गृहस्थ जीवन त्यागकर जैन मुनि बन गए थे। अब वे मुनि मलयरत्नसागरजी हो गए हैं। मुनिश्री 27 जनवरी को अपने गृह नगर आ रहे हैं। उनके मंगल प्रवेश पर जैन समाज द्वारा वृहद् कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

शहर में श्वेतांबर जैन समाज की ऋषभदेव छगनीरामपेढ़ी ट्रस्ट एवं श्रीसंघ खाराकुंआ के पूर्व अध्यक्ष महेंद्रकुमार सिरोलिया समाजसेवी के साथ इंजीनियर भी रहे। समाज के हर काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना उनकी आदत में बदल गया था। तत्कालिन श्री सिंथेटिक्स में वे इंजीनियर रहे। वहीं समाज सेवा के काम में सतत जुटे रहे। श्री सिंथेटिक्स बंद होने के बाद वे एक निजी कम्पनी में सेवा देने लगे। सेवानिवृत्त होने के बाद सारी गतिविधियां धार्मिक कार्यो में ही बितती रही। उनके में वैराग्य जागा और उन्होने

देवश्री नवरत्नसागर सुरीश्वर महाराज के प्रशिष्य,गणिवर्य आदर्शरत्नसागर महाराज से दीक्षा ले ली। उनको नाम दिया गया मुनि मलयरत्नसागरजी। अब मुनिश्री का मंगलप्रवेश 27 जनवरी को उज्जैन में होगा। चल समारोह प्रात: 9 कांच का मंदिर, दौलतगंज से प्रारंभ होकर सखीपुरा, इंदौरगेट, नई सड़क, कंठाल, सराफा, नमकमंड़ी होते हुए खाराकुंआ मंदिर उपाश्रय पहुंचेगा। यहां पर मुनिश्री की धर्मसभा होगी।

उनके दीक्षा समारोह के साक्षी उनकी पत्नि बीणाबेन सिरोलिया ,पुत्रवधु रिंकलबेन,पुत्र सौरभकुमार सिरोलिया,पुत्री-दामाद सुरभी-वरूण,पौत्री रिया,नाती मनन,रोमी बने थे। जुलाई-2020 में भोपाल में आयोजित दीक्षा समारोह के बाद उन्होने अपना सांसारिक जीवन त्याग दिया था।

मुनिश्री के सांसारिक पुत्र सौरभकुमार सिरोलिया ने बताया कि मुनिश्री दीक्षा ग्रहण करने के बाद 3 हजार किमी से अधिक की यात्रा कर चुके है। इस दौरान बद्रीनाथए हरिद्वार, राजस्थान सहित कई शहर और गांवों की यात्रा कर की और धर्म ध्वजा फैलाई। अब 27 जनवरी को उज्जैन आ रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/ ललित ज्वेल

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