सार्वजनिक क्षेत्र भारत के विकास की रीढ़: विभूति नारायण राय

सार्वजनिक क्षेत्र भारत के विकास की रीढ़: विभूति नारायण राय


सार्वजनिक क्षेत्र भारत के विकास की रीढ़: विभूति नारायण राय


संयुक्त कोयला मजदूर संघ एटक एक दिवसीय सेमीनार सम्पन्न

अनूपपुर, 22 नवंबर (हि.स.)। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का दृष्टिकोण था कि गरीब घर के बच्चे भी पढ़ सके, खेतों तक पानी पहुंचना चाहिए। उन्होंने ही आईआईटी की स्थापना कर तकनीकी के क्षेत्र में दुनिया में भारत को सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने का रास्ता प्रशस्त किया। भाखड़ा नंगल बांध का उद्घाटन करते समय नेहरू ने कहा था कि यह एक मंदिर ने भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर आदि स्टील प्लांट को नहीं लगाया होता तो टाटा महिंद्रा एवं अन्य उद्योगपति निर्माण के क्षेत्र में नहीं आए होते उन्हीं के बनाए हुए रास्ते पर चलकर इंदिरा गांधी ने वामपंथियों के दबाव में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। कोयला खदान का राष्ट्रीयकरण किया और एक तरह से सार्वजनिक क्षेत्र का जाल बिछा दिया मजदूरों की जिम्मेदारी हैं आर्थिक मामले में सजग रहते हुए सार्वजनिक क्षेत्र आपके हाथों से बाहर न जाने पाए इसके लिए भी सजग रहे।

यह बात मंगलवार को एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के राजनगर में संयुक्त कोयला मजदूर संघ एटक के सेमीनार में मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं वर्धा हिंदी यूनिवर्सिटी के कुलपति विभूति नारायण राय ने सार्वजनिक क्षेत्र के महत्त्व का जिक्र करते हुए कही। सेमीनार संयुक्त कोयला मजदूर संघ एटक के प्रांतीय अध्यक्ष हरिद्वार सिंह, उप महाप्रबंधक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय सिन्हा भी शामिल हुए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में एसईसीएल एटक के महामंत्री कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा की सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माण में एटक की बहुत बड़ी भूमिका थी। भारत में श्रम कानून बनवाने में हमारी बहुत बड़ी भूमिका थी इसीलिए हमारे नजरों के सामने कोई कोयला उद्योग को सार्वजनिक क्षेत्र को रसातल में मिलाएं सहन नहीं कर सकते, कुछ लोग संघर्ष नहीं करते संघर्ष के नाम पर ढोंग करते हैं, सरकार से मिलकर मजदूरों की आंखों में धूल झोंकते हैं ऐसे लोगों से कोयला मजदूरों को सावधान रहना है और एकता के दम पर कोयला उद्योग को बचाना है। हम पसीने की बूंद की पाई पाई हिसाब लेंगे एवं पसीना बहा कर सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा करेंगे यही आज की सर्वाधिक आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही सहयोग करते रहे हम और अधिक सेमिनार का आयोजन करेंगे।

प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ सुखदेव सिंह सिरसा ने सार्वजनिक क्षेत्र के महत्व को बताते हुए कहा के भारत का संविधान दुनिया का सबसे खूबसूरत संविधान है जिसमें हर जाति धर्म के लोगों को एक साथ रहने की इजाजत देता है कोई धर्म ग्रंथ नहीं है जिसमें ऊंच-नीच की बात ना हो सार्वजनिक क्षेत्र देश के संविधान को मजबूत करने में अहम भूमिका का निर्वहन किया है ना केवल सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार पैदा किया है बल्कि भाईचारा को भी मजबूत किया है्ं। सार्वजनिक क्षेत्र के ऊपर सुनियोजित तरीके से हमले हो रहे हैं उसको रोकने की जिम्मेदारी मजदूरों का आगे बढ़कर के लेना चाहिए यह सेमिनार सार्वजनिक क्षेत्र के प्रति मजदूरों के आस्था को मजबूत करेगा।

प्रगतिशील लेखक संघ पंजाब इकाई के महासचिव सुरजीत जज ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र अंधेरे के खिलाफ उम्मीद की एक रोशनी है गरीबी एवं अमीरी के बीच के दूरी को कम करने का माध्यम है सार्वजनिक क्षेत्र का मुनाफा सरकार के लिए होता है आम जनता के लिए होता है वही पूंजीपतियों के द्वारा कमाया हुआ मुनाफा उनका निजी होता हैं। इस फर्क को हम कैसे नहीं समझ सकते हैं।

हसदेव क्षेत्र के महाप्रबंधक यूटी कंजर ने कहा कि निश्चित रूप से राष्ट्रीयकरण के बाद कोयला उद्योग का समुचित विकास हुआ हैं। कोविड-19 के समय कोयला उद्योग मैं काम करने वाले मजदूर एवं अधिकारियों ने जान गवायी किंतु देश को अंधेरे में जाने नहीं दिया आज भी अथक प्रयास कर कोयला उद्योग थर्मल पावर को पर्याप्त कोयला दे रहें हैं। कोयला उद्योग में काम करने वाले कर्मचारी की बच्ची सृष्टि को कोल इंडिया ने 16 करोड़ रुपए की इंजेक्शन लगवा कर उसकी जान बचाई, यह कौन कर सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र होने के कारण कोल इंडिया जमीन के बदले नौकरी एवं मुआवजा देती हैं। सेमिनार कोयला मजदूरों में जिम्मेदारी का बोध कराएगा एवं कोयला उद्योग में काम करने का मजबूत वातावरण बनाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला

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