बैतूल: बालिकाओं से गुथवाया जा रहा आटा और बिनवाए जा रहे चावल

बैतूल: बालिकाओं से गुथवाया जा रहा आटा और बिनवाए जा रहे चावल


बैतूल, 23 नवम्बर (हि.स.)। स्कूल में स्वसहायता समूह का किस कदर आतंक है इसका अंदाजा सिर्फ बात से लगाया जा सकता है कि यहां पदस्थ एक शिक्षक ने समूह की प्रताड़ना से तंग आकर अपना स्थानांतरण करवा लिया है। वहीं स्कूल में पढऩे वाली छात्राओं की हालत यह है कि उनसे समूह के द्वारा आटा गुथवाया जा रहा है और चावल भी बिनवाए जा रहे हैं। इस स्थिति यह तंग आकर छात्राओं ने पढ़ाई का बहिष्कार कर जनसुनवाई में आकर प्रशासन को अपनी व्यथा बताई है। नाराज विद्यार्थी दो दिनों से स्कूल भी नहीं जा रहे हैं।

रिजल्ट खराब होने का सता रहा भय

प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला मंडई बुजुर्ग मीडिल स्कूल का है। शिक्षक के ट्रांसफर से अब बच्चों को रिजल्ट खराब होने का डर सता रहा है। अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे दर्जनों बच्चे अपने शिक्षक जीवंत राम खपरे के पिछले दिनों किए गए ट्रांसफर से आहत है। बच्चों की मांग है कि शिक्षक को दोबारा उनके स्कूल में पदस्थ किया जाए।

पढ़ाई के लिए नहीं है शिक्षक

जनसुनवाई में पहुंचे बच्चों ने जब शिक्षक जीवंत राम की वापसी की मांग की तो पता चला कि शिक्षक ने खुद स्वैच्छिक आधार पर अपना ट्रांसफर करवाया है। जो अब अगले मार्च तक निरस्त नहीं किया जा सकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को भरोसा दिलाया है कि स्कूल में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था बनाकर पढ़ाई व्यवस्थित कार्रवाई जाएगी।

विवाद की जड़ है स्व सहायता समूह

स्कूली बच्चों के मुताबिक स्कूल में अन्नपूर्णा स्व सहायता समूह भोजन बनाने का काम करता है। जिसकी अध्यक्ष पार्वती बाई खोडके है। जिसके पति दीना खोड़के का समूह पर प्रभाव है। वह समूह की हर गतिविधि में हस्तक्षेप करता है। यहां तक की स्कूल में बनने वाले मध्यान्न भोजन के लिए स्कूली बच्चों से चावल बिनने से लेकर आटा गूंथने तक का काम लिया जाता है। इसका पिछले दिनों शिक्षक जीवंत राम ने विरोध करते हुए बच्चों को इन गतिविधियों से हटाकर पढ़ाई के लिए बुला लिया था। जिससे नाराज होकर समूह अध्यक्ष के पति दीना ने शिक्षक जीवंत राम से अभद्रता की थी। जिससे आहत होकर शिक्षक ने अपना ट्रांसफर करवा लिया। यही समस्या बच्चों को आहत कर रही है।

बच्चों ने लगाए यह आरोप

बच्चो ने आरोप लगाया कि स्कूल में बनने वाले मध्यान भोजन में गड़बड़ी की जाती है। दाल जहां पतली होती है, वही बनने वाली खीर में पानी डाल दिया जाता है। इसके विरोध करने पर अभद्रता की जाती है। यहां तक की डर से कोई ग्रामीण भोजन की जांच करने तक स्कूल नहीं आता है।

हिन्दुस्थान समाचार/विवेक

हमारे टेलीग्राम ग्रुप को ज्‍वाइन करने के लि‍ये  यहां क्‍लि‍क करें, साथ ही लेटेस्‍ट हि‍न्‍दी खबर और वाराणसी से जुड़ी जानकारी के लि‍ये हमारा ऐप डाउनलोड करने के लि‍ये  यहां क्लिक करें।

Share this story