अनूपपुर: अमरकंटक में साल बोरर के 9,535 संक्रमित पेड़ों के लिए नहीं मिल रहीं भूमि, तलाश जारी
अनूपपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक वन परिक्षेत्र में साल बोरर से संक्रमित 9,535 पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के बाद लकड़ी के भंडारण के लिए वन डिपो बनाने की तैयारी में जमीन की कमी सामने आ रही है। वन विभाग पिछले 15 दिनों से करीब 6 हेक्टेयर जमीन की तलाश कर रहा है, लेकिन अब तक निर्धारित मानकों के अनुसार जमीन नहीं मिल सकी है।
वन विभाग के अनुसार प्रस्तावित वन डिपो के लिए एकमुश्त 6 हेक्टेयर जमीन चाहिए। जमीन आबादी या शहरी क्षेत्र से कम से कम 5 किलोमीटर दूर होनी चाहिए। इसके अलावा जमीन बंजर हो और खेती योग्य नहीं हो, वन क्षेत्र के आसपास न हो तथा डिपो तक लकड़ी पहुंचाने के लिए उपयुक्त रास्ता उपलब्ध हो। रास्ता वन क्षेत्र से सटा हुआ नहीं होना चाहिए।
वन विभाग के अनुसार केंद्र सरकार से अमरकंटक में 9,535 संक्रमित साल पेड़ों की कटाई की अनुमति मिली है। विभाग अक्टूबर में कटाई की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि कटाई के लिए टीएस मिलने का इंतजार बताया गया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार अमरकंटक के 8,584 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 17 कक्षों में करीब 40 लाख साल के पेड़ हैं। इनमें करीब 60 हजार पेड़ों के संक्रमित होने और 9,535 पेड़ों के अति संक्रमित पाए जाने की जानकारी दी गई है। संक्रमण की स्थिति के आधार पर पेड़ों को टी-1 से टी-6 श्रेणियों में बांटा गया है। वन विभाग की 16 समितियां साल बोरर कीटों के नियंत्रण और नष्टीकरण के काम में लगी हैं। विभाग के अनुसार अब तक 40,200 साल बोरर कीटों को पकड़कर नष्ट किया जा चुका है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 1995-96 में भी अमरकंटक क्षेत्र में साल बोरर का प्रकोप सामने आया था। उस समय प्रभावित पेड़ों को काटकर जंगल से हटाया गया था। करीब 30 साल बाद संक्रमण की स्थिति को देखते हुए देहरादून स्थित FRI की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन किया है। बारिश के बाद जबलपुर स्थित SFRI की टीम द्वारा भी परीक्षण किए जाने की जानकारी दी गई है।
वन परिक्षेत्राधिकारी अमरकंटक वीरेंद्र श्रीवास्तव ने शुक्रवार को बताया कि 6 हेक्टेयर की एकमुश्त निजी जमीन उपलब्ध हुई थी, लेकिन वह अमरकंटक से करीब 90 किलोमीटर दूर है। उनके अनुसार इतनी दूरी पर डिपो बनाने में परिवहन लागत बढ़ने के साथ समय, दूरी और सुरक्षा की व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

