मोहर्रम जुलूस धमाका मामला: पुलिस की कार्रवाई तेज, आरोपियों की संख्या 14 पहुंची, क्रेन मालिक जेल भेजा गया

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मोहर्रम जुलूस धमाका मामला: पुलिस की कार्रवाई तेज, आरोपियों की संख्या 14 पहुंची, क्रेन मालिक जेल भेजा गया


उज्जैन , 26 जून (हि.स.)। मप्र के उज्जैन जिला, बड़नगर में मोहर्रम के अवसर पर निकाले गए जुलूस के दौरान क्रेन से लगभग 40 फीट ऊंचाई पर एक मैजिक वाहन लटकाकर उसमें आतिशबाजी के जरिए विस्फोट करने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में अब तक दर्ज आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इसमें और लोगों के नाम भी शामिल किए जा सकते हैं। शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को न्यायालय ने तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जबकि क्रेन मालिक विजय माली को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यह मामला 23 और 24 जून की दरमियानी रात का है, जब बड़नगर तहसील के अडान मोहल्ला से मोहर्रम के अवसर पर पारंपरिक जुलूस निकाला गया था। जुलूस जब विजय स्तंभ चौक पहुंचा, तब एक मैजिक वाहन को क्रेन की सहायता से करीब 40 फीट ऊंचाई तक लटकाया गया। इसके बाद वाहन में रखी आतिशबाजी को विस्फोटित किया गया, जिससे तेज धमाका हुआ। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले अडान मोहल्ला अखाड़े के उस्ताद शोएब पिता गब्बू खान, जाहिद पिता भूरा खान, तपसील उर्फ तस्लीम पिता नेहरू खान तथा क्रेन चालक एवं मालिक विजय माली के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने विजय माली को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि शेष तीन आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया, ताकि उनसे घटना की विस्तृत पूछताछ की जा सके।

पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल चार लोगों तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान आयोजन समिति से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। इसी आधार पर शुक्रवार को पुलिस ने 10 और लोगों को आरोपी बनाया है। अब इस मामले में कुल 14 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज हो चुका है। थाना प्रभारी कमलेश सिंगार ने बताया कि पुलिस लगातार साक्ष्य जुटा रही है और जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

घटना में इस्तेमाल किए गए मैजिक वाहन और क्रेन को पहले ही जब्त कर लिया गया था। शुक्रवार को उज्जैन से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम बड़नगर थाने पहुंची और लगभग दो घंटे तक वाहन की वैज्ञानिक जांच की। एफएसएल अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि मैजिक वाहन में किस प्रकार की आतिशबाजी या विस्फोटक सामग्री का उपयोग किया गया था तथा धमाका किस तकनीक से किया गया। जांच के दौरान वाहन के विभिन्न हिस्सों से नमूने भी लिए गए, जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

थाना प्रभारी कमलेश सिंगार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी प्रकार के विस्फोटक पदार्थ या आतंकी गतिविधि की आशंका की पुष्टि नहीं हुई है। प्रारंभिक जांच में आतिशबाजी का उपयोग सामने आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच केवल बड़नगर थाना पुलिस द्वारा की जा रही है और किसी अन्य विशेष जांच एजेंसी को फिलहाल शामिल नहीं किया गया है।

इधर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) राकेश गुप्ता ने भी पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला आतिशबाजी से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही अटकलों के विपरीत इस मामले की जांच के लिए न तो एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) को बुलाया गया है और न ही किसी अन्य विशेष जांच एजेंसी को शामिल किया गया है। पूरा अनुसंधान स्थानीय स्तर पर बड़नगर थाना पुलिस ही कर रही है।

एडीजीपी ने यह भी स्वीकार किया कि घटना के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में कुछ स्तर पर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि इतनी बड़ी और जोखिमपूर्ण गतिविधि सार्वजनिक स्थान पर कैसे आयोजित हुई और उस समय मौजूद पुलिस बल ने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए। पूरे मामले की विवेचना के बाद यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक आयोजनों के दौरान इस प्रकार के खतरनाक स्टंट न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि आम लोगों की जान को भी गंभीर खतरे में डाल सकते हैं। इसलिए पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है, ताकि घटना में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। एफएसएल रिपोर्ट, आरोपियों से पूछताछ और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है तथा सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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