नवरात्रि विशेषः छिंदवाड़ा का प्राचीन एवं सिद्ध मंदिर है श्री संतोषी माता मंदिर
छिंदवाड़ा, 24 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा शहर के चार फाटक क्षेत्र में स्थित श्री संतोषी माता मंदिर नगर का एक अत्यंत प्राचीन एवं सिद्ध मंदिर है, जिसे नगर देवी सिद्धपीठ के रूप में भी जाना जाता है।
मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है। प्रारंभिक समय में माता रानी की पूजा एक मढ़िया में पीपल के पेड़ के नीचे की जाती थी। वर्ष 1930 के बाद जब यह क्षेत्र नई आबादी के रूप में विकसित हुआ, तब शुक्ला परिवार द्वारा इस स्थान को मंदिर निर्माण हेतु समर्पित किया गया।
मंदिर निर्माण की प्रक्रिया- प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1952 में क्षेत्र की निवासी जैना बाई एवं सुखराम मिस्त्री ने एक समिति का गठन कर क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया। मंदिर में प्रमुख मूर्तियों की स्थापना तिवारी परिवार, अग्रवाल परिवार, चांडक परिवार एवं साहू परिवार द्वारा की गई।
यात्रियों के लिए सुविधा केंद्र- प्राचीन समय में छिंदवाड़ा का प्रवेश द्वार माने जाने के कारण बाहर से आने वाले यात्री नगर में प्रवेश करने से पहले इस मंदिर में दर्शन करते थे। यहां यात्रियों के लिए रात्रि विश्राम एवं भोजन-पानी की भी व्यवस्था की जाती थी। वर्तमान में भी मंदिर के माध्यम से विभिन्न सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
नवरात्रि महोत्सव एवं धार्मिक आयोजन- नवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मनोकामना कलश स्थापित करते हैं। प्रथम दिन कलश स्थापना, पंचमी को भव्य आरती, अष्टमी को हवन-पूजन तथा नवमी को कन्या भोज एवं कलश विसर्जन का आयोजन किया जाता है। प्राचीन परंपरा के निर्वहन के कारण मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था बनी हुई है।
मुख्य मूर्तियां एवं पूजन स्थल- मंदिर में मुख्य रूप से अंबा माई दुर्गा जी की प्रतिमा विराजमान है। इसके अतिरिक्त शीतला देवी, अन्नपूर्णा देवी, भगवान गणेश, काल भैरव, संतोषी माता, शिवलिंग एवं हनुमान जी की भी स्थापना की गई है।
मंदिर संचालन एवं प्रबंधन- पिछले 36 वर्षों से पंडित दयाराम दुबे मंदिर में पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में मंदिर का संचालन प्रशासन द्वारा गठित ट्रस्ट के माध्यम से किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / sandeep chowhan

