अनूपपुर: जिले भर में मनाया गया भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव, निकाली गई शोभायात्रा
अनूपपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में ऋषि संस्कृति के प्रखर प्रकाश पुंज भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव अक्षय तृतीया 20 अप्रैल (सोमवार) को पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ जिला मुख्यालय अनूपपुर सहित जिले के जैतहरी, चचाई, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक, बिजुरी, कोतमा, राजनगर, संजय नगर,भालूमांडा सहित अन्य ग्रमीण क्षेत्रों में लोगों ने श्रध्दा और उल्लास से मनाया।
जिला मुख्यालय अनूपपुर में दो अलग-अलग स्थासनों में भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव मनाया गया। बुढीमाई मंदिर पुरानी बस्ती वार्ड नंबर 13 में भगवान परशुराम की विधिवत पूजा अर्चना कर युवा ब्राह्मणों द्वारा विशाल शोभा यात्रा निकाली गई जो अमरकंटक तिराहा से सामतपुर मंदिर, मुख्य बाजार, चेतना नगर होते हुए तिपान नदी स्थित शिव मंदिर में समाप्त हुई। वहीं इसके भगवान परशुराम का प्राकट्योत्सव ब्राह्मण समाज द्वारा मनाया गया। विप्र समाज द्वारा भगवान श्रीपरशुराम का जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे वैदिक मंत्रो द्वारा पूरे रीती रिवाज से अपरान्ह वैदिक पूजन अर्चन के बाद सुन्दर काण्ड का सस्वर पाठ एवं सायं से प्रसाद (भण्डारा) वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसअवसर पर ब्रह्म समाज द्वारा भगवान परशुराम की शोभायात्रा नगर के कई स्थांनों में स्वागत से किया गया। ब्रह्म समाज ने कहा कि ब्रह्माण शरीर का मस्तिष्क माना जाता है जिस पर जवाबदारी है कि सभी समाज और धर्म को लेकर साथ चलें। राजेन्द्रग्राम में ब्राह्मण समाज ने भगवान श्री परशुराम की पूजा अर्चना कर शोभायात्रा निकाली गई।
जैतहरी के परशुराम चौक में गूंजा “जय जय परशुराम”, लिया स्थायी शेड निर्माण का संकल्प
जैतहरी नगर में भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव पर परशुराम चौक में विप्र समाज द्वारा गरिमामय कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोगों ने सहभागिता कर समाज की एकजुटता और आस्था का अद्वितीय परिचय दिया। इस दौरान परशुराम चौक में स्थायी शेड का निर्माण कराया जाने की घोषण की गई। जिससे भविष्य में धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों को और अधिक सुव्यवस्थित रूप से संपन्न किया जा सके। शुभारंभ में भगवान परशुराम के पूजन, अर्चन, वंदन एवं महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।
विप्र समाज के आवाहन पर विशेष रूप से जैतहरी एवं आसपास के क्षेत्रों सहित पूरे जिले से ब्राह्मण समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। जिसमे ब्राह्मण एकता की ऐतिहासिक सफलता की चर्चा करते हुए सभी समाजजनों को साधुवाद दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार समाज ने एक मंच पर संगठित होकर अपनी शक्ति का परिचय दिया है, वह पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है। अंत में समाज के हितों की रक्षा और आवश्यकता पड़ने पर सदैव एकजुट रहने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में रूप से पंडित विद्याधर शुक्ला, पंडित रोहिणी त्रिपाठी, पंडित सुरेंद्र शुक्ला, पंडित रोहिणी प्रसाद तिवारी, पंडित शेषनारायण शुक्ला, रामसजीवन गौतम, पंडित सत्येंद्र दुबे, पंडित विजय शुक्ला, पंडित महेश प्रसाद तिवारी, पंडित राजेंद्र द्विवेदी, पंडित दुर्गा प्रसाद तिवारी, पंडित विजय मिश्रा, पंडित मयंक त्रिपाठी, पंडित विद्याधर पांडे, पंडित श्याम नारायण शुक्ला, शास्त्री जी तथा पंडित द्वारिका प्रसाद त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि हिन्दू समाज के लिये अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव अत्यंत शुभ, सिद्ध एवं सर्वकल्याणकारी पर्व होने के कारण सुबह से ही लोगों ने पूजा अर्चना की तथा एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात किया गया था। कोतमा में भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव पर विप्र बंधुओं ने ठाकुर बाबा प्रांगण में भगवान परशुराम का पूजन उपरांत कन्या भोज का आयोजन किया गया।
कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म ब्राह्मण कुल में ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। धार्मिक ग्रंथों में बताया जाता है कि ऋषि जमदग्नि सप्त ऋषियों में से एक थे। ऐसा किवंदतियां प्रचलित हैं कि भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ था, जिस कारण वे अति तेजस्वी, ओजस्वी और पराक्रमी थे। इनके बारे में किए वर्णन के अनुसार प्राचनी काल में एक बार इन्होंने अपने पिता की आज्ञा पर अपनी माता का सिर काट दिया था। परंतु बाद में अपने पिता से वरदान के रूप में उन्हें जीवित करने का वचन मां को पुन:जीवित कर लिया था। इसी प्रकार जब परशुराम ने क्षत्रियों को मारना बंद कर दिया, तो उन्होंने खून से सना अपना फरसा समुद्र में फेंक दिया, इससे समुद्र इतना डर गया कि वह फरसा गिरने वाली जगह से बहुत पीछे हट गये समुद्र के पीछे हटने से जो जगह बनी वो केरल बना, इसी मान्यता के आधार पर केरल में परशुराम की पूजा की जाती है। शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्रविद्या प्रदान की थी। शस्त्रो में अवशेष कार्यो में कल्कि अवतार होने पर उनका गुरुपद ग्रहण कर उन्हें शस्त्रविद्या प्रदान करना भी बताया गया।
नर्मदा मंदिर में मनाया गया परशुराम प्रगटोत्सव
मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली अमरकंटक में वैशाख शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम का प्रगटोत्सव धूमधाम के साथ पूजा अर्चन कर मनाया गया। साथ ही ब्राह्मणों द्वारा भगवान परशुराम की शोभायात्रा निकाल कर नगर भ्रमण कर वापस मुख्य मार्ग होते हुए मंदिर पहुंच समाप्त किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

