चांदी की पालकी में निकले श्रीजी, क्षमावाणी के साथ दशलक्षण महापर्व संपन्न

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चांदी की पालकी में निकले श्रीजी, क्षमावाणी के साथ दशलक्षण महापर्व संपन्न


चांदी की पालकी में निकले श्रीजी, क्षमावाणी के साथ दशलक्षण महापर्व संपन्न


चांदी की पालकी में निकले श्रीजी, क्षमावाणी के साथ दशलक्षण महापर्व संपन्न


रामगढ़, 29 सितंबर (हि.स.)। जैन धर्म के पावन दशलक्षण महापर्व का समापन मंगलवार को क्षमावाणी पर्व के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ।

इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा परमपूज्य अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य 108 श्री वसुनंदी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 पुण्यानंद महाराज, मुनिश्री 108 शुभानंद महाराज एवं क्षुल्लकश्री 105 दिव्यानंद महाराज के पावन सानिध्य में निकाली गई।

दशलक्षण महापर्व के दस दिनों तक जैन समाज में भक्ति, तप, संयम और आत्मशुद्धि का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्माराधना की। महापर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी पर्व के अवसर पर समाज के लोगों ने परस्पर क्षमा याचना करते हुए मन के बैर, द्वेष और कटुता को समाप्त कर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष राजेंद्र चूड़ीवाल ने बताया कि शोभायात्रा में चांदी की पालकी पर भगवान श्रीजी को विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। अभिषेक और शांतिधारा के पुण्यार्जक महिपाल जैन, अशोक जैन, सुनील जैन एवं संजय सेठी परिवार सहित समस्त सेठी परिवार रहे। वहीं, श्रीजी की पालकी को नगर भ्रमण कराने का पुण्य अरुणा एवं डॉ शरद जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक भजनों और भगवान श्रीजी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीजी के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

इस अवसर पर मुनिश्री ने मंगल प्रवचन में क्षमावाणी पर्व के वास्तविक अर्थ एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है। मन में किसी के प्रति बैर, द्वेष या कटुता न रखते हुए अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों की भूलों को क्षमा करना ही क्षमावाणी पर्व की सच्ची भावना है। उन्होंने कहा कि क्षमावाणी पर्व हमें अपने भीतर झांकने, अपनी गलतियों को स्वीकार करने और रिश्तों में प्रेम और सद्भाव स्थापित करने की प्रेरणा देता है। इसी भावना के साथ समाज के लोगों ने एक-दूसरे से क्षमा याचना कर दशलक्षण महापर्व का समापन किया। कार्यक्रम की जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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