रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति की नई कमिटी ने पदभार ग्रहण किया
रांची, 04 मई (हि.स.)। रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति की नई कमिटी ने सोमवार को विधिवत रूप से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर अपना पदभार ग्रहण किया।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष जस्टिस डॉ. एस.एन. पाठक, उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह एवं वीरेंद्र तिवारी, सचिव राकेश सिन्हा तथा सदस्य अमरेंद्र सिंह, दीपक ओझा, मिहुल प्रसाद, अरुण वर्मा एवं बादल सिंह उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने पहाड़ी बाबा, नाग देव मंदिर, माता रानी मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, काली मंदिर एवं महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना कर कार्यभार संभाला।
समिति ने आरोप लगाया कि पूर्व में मंदिर से जुड़े लगभग 6.74 करोड़ रुपये के टेंडर में भारी अनियमितता एवं भ्रष्टाचार हुआ है। साथ ही करोड़ों रुपये मूल्य के लोहे और प्लास्टिक सामग्री के दुरुपयोग एवं बिक्री का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में बने नए हॉल एवं अच्छी गुणवत्ता की सीढ़ियों को तोड़कर धन का दुरुपयोग किया गया। इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की बात कही गई है।
समिति ने यह भी बताया कि पदभार ग्रहण करने से पूर्व संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद रांची के उपायुक्त एवं सदर अनुमंडल पदाधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं हुए। मंदिर कार्यालय सहित अन्य कक्षों में ताले लगे पाए गए, यहां तक कि ताले के ऊपर भी ताले लगाए गए थे, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं कि आखिर किन लोगों की ओर से पूरे मंदिर परिसर को इस तरह बंद किया गया।
नई कमिटी ने यह भी आरोप लगाया गया कि राजेश गाड़ोदिया एवं सुनील माथुर की ओर से मंदिर परिसर में राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की गई। मुख्य द्वार एवं सीढ़ियों को घेरकर आम भक्तों के प्रवेश में बाधा डाली गई, जिससे श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। समिति के अनुसार,राजेश गाड़ोदिया एवं सुनील माथुर के के जरिये बाहर के गुंडे को बुलाकर हंगामा कराया गया तथा ध्वनि उपकरणों के माध्यम से अशोभनीय व्यवहार किया गया।
समिति के सदस्यों ने बताया कि जब उन्होंने शांति बनाए रखने और मंदिर की गरिमा बनाए रखने की अपील की, तब कुछ व्यक्तियों की ओर से बाहरी लोगों को बुलाकर विवाद को बढ़ाने का प्रयास किया गया। इससे मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया। हालांकि समिति के अमरेन्द्र सिंह, दीपक ओझा , मेहुल प्रसाद , अरुण वर्मा एवं बादल सिंह की सूझ-बूझ से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया, अन्यथा कोई बड़ी घटना हो सकती थी।
समिति ने आरोप लगाया कि राजेश गाड़ोदिया एवं सुनील माथुर अपने स्वार्थ के लिए माहौल को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं और संभावित जांच से बचने के लिए जानबूझकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। समिति ने यह भी कहा कि जब इस समिति में उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल हैं, तब जांच से डरने का कोई कारण नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ लोग इसी कारण भयभीत होकर वातावरण को दूषित करने की कोशिश कर रहे हैं।
अंत में समिति ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे असामाजिक तत्वों पर शीघ्र कार्रवाई की जाए, ताकि मंदिर परिसर की शांति और गरिमा बनी रहे। मंदिर आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, इसे किसी भी प्रकार से राजनीतिक मंच या विवाद का स्थल बनाना निंदनीय है और इससे लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

