गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती : श्री सुयश सागर महाराज

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गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती : श्री सुयश सागर महाराज


रांची, 26 जून (हि.स.)। ओडिशा से तिलैया विहार के क्रम में परमपूज्य 108 श्री सुयश सागर महाराज का आगमन झारखंड की राजधानी रांची में शुक्रवार को हुआ।

प्रातः 06 बजे बिरसा चौक से हरमू रोड किशोरगंज के रास्ते भुइयांटोली से विहार होकर लगभग 8.30 बजे मुनिश्री अपर बाजार जैन मन्दिर पहुंचे रास्ते में जगह जगह पर भक्तों ने उनका पाद प्रक्षालन और आरती कर अगुवानी की।

वहीं मन्दिर पहुंचने के बाद धर्म सभा हुई। धर्म सभा में मुनी श्री ने प्रवचन में कहा कि जो उत्साह पिछले प्रवास में रांचीवासियों में था वही उत्साह आज भी बरकरार है, बल्कि उससे भी ज्यादा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अंतरंग का इनका उत्साह बता रहा है कि यहां के लोग निस्वार्थ साधु की सेवा वैयावृत्ति में निपुण है अग्रणी है। इनका पुण्य है कि साधु स्वयं ही चातुर्मास को आतुर रहते हैं निश्चित मानकर चलना पुण्य के नियोग से संसार में सामान्य सी वस्तु भी प्राप्त नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि जिस धर्म का प्राप्त होना, देव शास्त्र की भक्ति प्राप्त होना सहज है, लेकिन देव शास्त्र के साथ-साथ गुरु का समागम मिलना दुर्लभ है। गुरु के समागम के बिना देव शास्त्र की बातें समझ ही नहीं आती। इसलिए गुरु का स्थान अग्रणी और सर्वोत्तम है। इसलिए अरिहंत को सर्वप्रथम स्थान मिला है।

सभा का संचालन मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा ने किया और बाहर से आए अतिथियों का स्वागत किया।

सभा में पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, छीतरमल गंगवाल, नरेन्द्र पांड्या, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, पदम गोधा, कैलाश बड़जात्या स्मिता पांड्या, वर्तमान कार्यकरिणी के सदस्यों और बाहर से आए खूंटी और झुमरीतिलैया के अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।

यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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