विधानसभा में जयराम महतो ने ग्रामीण-शहरी विकास की बढ़ती खाई पर जताई चिंता, योजनाओं में पारदर्शिता की मांग

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विधानसभा में जयराम महतो ने ग्रामीण-शहरी विकास की बढ़ती खाई पर जताई चिंता, योजनाओं में पारदर्शिता की मांग


रांची, 27 फ़रवरी (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में शुक्रवार को विधायक जयराम महतो ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बढ़ती विकासात्मक असमानता पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े पूर्व मंत्रियों आलमगीर आलम, एनोस एक्का और हरिनारायण राय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विभाग पहले भी विवादों में रहा है और कई मामलों में मंत्रियों को जेल तक जाना पड़ा है। ऐसे में वर्तमान मंत्री को विशेष सतर्कता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

विधायक ने कहा कि शहरों की तुलना में अब गांवों में बिचौलियों की सक्रियता अधिक बढ़ गई है, जिसके कारण सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि रिश्वत लेना अन्याय है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

जयराम महतो ने सुझाव दिया कि प्रत्येक निर्माण स्थल पर शिलापट्ट के साथ क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से लगाया जाए, ताकि आम नागरिक यह जान सकें कि कार्य किस एजेंसी द्वारा कराया गया, उस पर कितनी राशि खर्च हुई और गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के तहत सड़क और पुल निर्माण सबसे महत्वपूर्ण कार्य हैं, लेकिन इन परियोजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी की कमी दिखाई दे रही है। विधायकों द्वारा लगातार मुद्दे उठाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।

महतो ने आरोप लगाया कि प्रखंड और अंचल स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है तथा रिश्वतखोरी आम समस्या बन चुकी है। उन्होंने निर्माण कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी परियोजना की गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों को आपत्ति हो तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित होगी। साथ ही विभागीय योजनाओं की नियमित निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण तथा तकनीकी जांच को अनिवार्य बनाने की मांग की, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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