विधानसभा में गूंजा सड़क जाम और मतदाता सूची का मुद्दा, नवीन जायसवाल व प्रदीप यादव ने सरकार को घेरा

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विधानसभा में गूंजा सड़क जाम और मतदाता सूची का मुद्दा, नवीन जायसवाल व प्रदीप यादव ने सरकार को घेरा


रांची, 16 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन सोमवार को सदन में सड़क जाम, प्रदर्शन और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने सहित कई मुद्दे जोर-शोर से उठे। हटिया विधायक नवीन जायसवाल और पौड़ैयाहाट से विधायक प्रदीप यादव ने इन मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने विधानसभा आने-जाने के दौरान हो रही परेशानी और सड़क जाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति के कारण उन्हें और अन्य लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मुख्य सड़क पूरी तरह जाम थी, जिसके कारण उन्हें करीब तीन किलोमीटर घूमकर विधानसभा पहुंचना पड़ा।

जायसवाल ने कहा कि ऐसी स्थिति में आम लोगों और जनप्रतिनिधियों दोनों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि रसोइया और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन कर रही थीं, जिससे रास्ता बंद हो गया और ट्रैफिक पूरी तरह प्रभावित हो गया।

उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव से पहले कई वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया है। यदि समय पर समस्याओं का समाधान किया जाता, तो लोगों को सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती। उन्होंने सदन में मौजूद मंत्रियों से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।

वहीं विधायक प्रदीप यादव ने सदन में मतदाता सूची से नाम हटाने और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, बिहार में करीब 65 लाख और अन्य राज्यों में लगभग एक करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। झारखंड में भी पैरेंटल मैपिंग के नाम पर अब तक लगभग 12 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जा चुके हैं और यह संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे आदिवासी, दलित, पिछड़े और मुसलमान समुदाय के लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदीप यादव ने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुमका में हुई चौकीदार बहाली में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी होने के बावजूद ओबीसी वर्ग को एक भी पद नहीं मिला। उन्होंने सरकार से मांग की कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ पहल की जाए।

उन्होंने जातीय जनगणना कराने की भी मांग की, ताकि सभी वर्गों को उनका अधिकार मिल सके। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत नियोजन कानून का मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में अपील करनी चाहिए।

प्रदीप यादव ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था में स्थानीय युवाओं के शोषण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई जगहों पर नौकरी दिलाने के नाम पर भारी वसूली की जा रही है।

उन्होंने सर्वजन पेंशन योजना की सराहना करते हुए कहा कि बीपीएल की शर्त खत्म होने से लाभार्थियों की संख्या लगभग 14 लाख से बढ़कर करीब 64 लाख हो गई है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि कई अंचल अधिकारियों की ओर से सरकारी निर्देशों के बावजूद भूमिहीन और दलित लोगों को निवास प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

विधायक प्रदीप यादव ने अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता से जुड़े मामलों को जल्द सुलझाने और 1980 से लंबित भूमि सर्वेक्षण को पूरा करने की भी मांग की। उनका कहना था कि जमीन का सर्वे पूरा होने से भूमि विवाद कम होंगे और लोगों को राहत मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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