झारखंड विधानसभा में डीएमएफटी फंड के उपयोग पर चर्चा, दायरा बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

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झारखंड विधानसभा में डीएमएफटी फंड के उपयोग पर चर्चा, दायरा बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल


रांची, 16 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में सोमवार को खनन क्षेत्रों के विकास और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस दौरान विधायकों ने फंड के उपयोग के दायरे, इसके प्रभाव और संभावित दुरुपयोग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

विधायक प्रदीप यादव ने खान एवं भूतत्व विभाग से सवाल किया कि क्या भारत सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार खनन क्षेत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में ही डीएमएफटी फंड से विकास कार्य करने का प्रावधान तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के कारण डीएमएफटी फंड जिले के कुछ सीमित हिस्सों में ही खर्च हो जाता है, जिससे अन्य प्रभावित क्षेत्र विकास से वंचित रह जाते हैं और क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए क्या कोई नई योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र महतो ने बताया कि झारखंड जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट नियम, 2024 के नियम 5 (ए) के अनुसार खनन पट्टा क्षेत्र से सीधे प्रभावित क्षेत्र, जो 15 किलोमीटर के दायरे में आते हैं और नियम 5 (बी) के तहत अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र, जो 25 किलोमीटर के दायरे में आते हैं, वहां डीएमएफटी फंड का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह राशि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेवाई) गाइडलाइन, 2024 के तहत खर्च की जाती है।

मंत्री ने बताया कि खनन से प्रभावित लोगों की पहचान ग्राम सभा या शहरी निकायों के स्थानीय एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद की जाती है और उसी आधार पर विकास कार्यों के लिए डीएमएफटी फंड का उपयोग किया जाता है।

इस पर विधायक प्रदीप यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि फंड का उपयोग सीमित क्षेत्र में ही किया जाएगा, तो पूरे जिले में संतुलित विकास कैसे सुनिश्चित होगा। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट नीति बताने की मांग की।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सारंडा क्षेत्र में लौह अयस्क (आयरन ओर) की खदानें हैं और वहां 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में गांवों की संख्या सीमित है। ऐसे में डीएमएफटी फंड की पूरी राशि का उपयोग संभव नहीं हो पाएगा और बड़ी राशि बची रह सकती है।

इस दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष सहमत हों, तो इस विषय पर सदन में प्रस्ताव भी लाया जा सकता है, ताकि इस पर व्यापक चर्चा हो सके। वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि फिलहाल 15 और 25 किलोमीटर के दायरे में डीएमएफटी फंड खर्च करने का जो प्रावधान है, वह सही है। पहले यह देखना जरूरी है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में इस राशि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में डीएमएफटी फंड के दुरुपयोग की शिकायतें भी सामने आई हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सुझाव दिया कि फंड के दायरे को बढ़ाने से पहले इसके उपयोग की निगरानी के लिए विधानसभा की एक टीम गठित की जानी चाहिए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में वे लातेहार गए थे। वहां कार्यकर्ताओं ने उन्हें एक जिम दिखाया, जिसके बारे में बाद में पता चला कि उसका निर्माण डीएमएफटी फंड से कराया गया है। उन्होंने बोकारो और रामगढ़ सहित कई जिलों में डीएमएफटी फंड के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया।

इस पर मंत्री योगेंद्र महतो ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की चिंता उचित है। कुछ मामलों की जांच चल रही है और यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नई नियमावली में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार से भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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