संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और रखें त्यागपूर्वक उपभोग की भावना : आलोक
रामगढ़, 20 जून (हि.स.)। स्वदेशी जागरण मंच रामगढ़ कैंट शाखा के तत्वाधान में शनिवार को सत्र 2026-28 के अंतर्गत ज्ञान मंदिर विद्यालय परिसर में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
स्वदेशी विचार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के संस्थापक ब्रह्मानंद पाठक की उल्लेखनीय भूमिका रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संयोजक मृणाल राठौर ने की, जबकि मंच संचालन प्रोफेसर पिंकी कुमारी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र संयोजक अमरेंद्र सिंह, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज सिंह, प्रांत सह-संयोजक आलोक सिंह, प्रांत पूर्णकालिक हिमांशु शेखर तथा रांची जिला संयोजक आंचल तिवारी उपस्थित थेे। कार्यक्रम में सभी अतिथियों का अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में प्रांत सह-संयोजक आलोक सिंह ने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र वसुधैव कुटुम्बकम् का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन ही मानवता की वास्तविक आवश्यकता है। उन्होंने कम में अधिक के सिद्धांत को भारतीय जीवन पद्धति का आधार बताते हुए संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और त्यागपूर्वक उपभोग की भावना को अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज सिंह ने जल संरक्षण, पौधारोपण और ऊर्जा बचत को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में ईंधन की बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है। उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि अमरेंद्र सिंह ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच की जिला इकाई केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वदेशी विचारधारा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने दायित्व को साधना मानकर कार्य करे तो संगठन और अधिक मजबूत होगा और स्वदेशी का राष्ट्रव्यापी अभियान नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा संगठन की शक्ति कार्यकर्ता में है। कार्यकर्ता की शक्ति विचार में है और विचार की शक्ति दायित्वपूर्ण आचरण में है। उन्होंने युवाओं से स्वदेशी के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने और आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

