टुसू पर्व झारखंड की पहचान का प्रतीक : देवेंद्रनाथ

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टुसू पर्व झारखंड की पहचान का प्रतीक : देवेंद्रनाथ


रांची, 11 जनवरी (हि.स.)। झारखंडी भाषा, खतियान संस्कृति समिति की ओर से रविवार को राजधानी रांची के मेन रोड क्षेत्र में आयोजित राजधानी टुसू महोत्सव पारंपरिक उत्साह, लोक आस्था और सांस्कृतिक रंगों के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान मंच पर कलाकारों ने नाटिका, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महोत्सव के मुख्य अतिथि देवेंद्रनाथ महतो ने अपने संबोधन में कहा कि टुसू पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि झारखंड की सामाजिक एकता, लोक संस्कृति और सामूहिक आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

महोत्सव में रांची समेत आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवक-युवतियां और बच्चे शामिल हुए। टुसू झांकी में शामिल प्रतिभागी चौड़ल के साथ नृत्य-संगीत करते हुए मेन रोड से गुजरते हुए आयोजन स्थल तक पहुंचे, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था कर यातायात को नियंत्रित किया।

कार्यक्रम के दौरान कुंवारी कन्याओं ने विधिवत टुसू थापन, टुसू पूजन, टुसू वंदना और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। इसके बाद खपरा पीठा, गुड़ पीठा और खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का वितरण किया गया, जिसे लोगों ने उत्साहपूर्वक ग्रहण किया।

इस आयोजन में विजय सिंह, मजबूल खान, पूजा महतो, दीपक रवानी, अनंत महतो, निवेदिता देवी, बिहारी महतो, संतोष महतो, सष्टी रंजन, गोपेश्वर महतो, सूरज साहू सहित सैकड़ों टुसू प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

राजधानी टुसू महोत्सव ने झारखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिक सहभागिता को एक बार फिर जीवंत कर दिया और पूरे आयोजन स्थल को उत्सवमय बना दिया।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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