कस्तूरबा विद्यालयों को सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के रूप में किया जाएगा विकसित : शशि रंजन
-कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की वार्डन्स के सशक्तिकरण के लिए आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू
रांची, 19 जनवरी (हि.स.)। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) एवं राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार से झारखंड और छत्तीसगढ़ में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों (केजीबीवी) की वार्डन्स के सशक्तिकरण के उद्देश्य से पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला का उद्घाटन झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने किया। इस प्रशिक्षण में चयनित वार्डन्स मास्टर ट्रेनर के रूप में भाग ले रही हैं, जो आगे चलकर अन्य वार्डन्स को भी प्रशिक्षित करेंगी।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक शशि रंजन ने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय झारखंड में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। केजीबीवी की सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसी तर्ज पर झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों की स्थापना की है, जिनका संपूर्ण वित्तपोषण राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से न केवल केजीबीवी, बल्कि झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों की वार्डन्स को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
निदेशक शशि रंजन ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है और इन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आशा जताई कि इन विद्यालयों से राज्य को भविष्य में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
वार्डन्स बच्चियों के लिए मां की भूमिका निभाती हैं: प्रो. शशिकला वंजारी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनआईईपीए की कुलपति प्रोफेसर शशिकला वंजारी ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की वार्डन्स के क्षमता निर्माण और सशक्तिकरण के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि केजीबीवी स्कूली शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन विद्यालयों में वार्डन्स केवल केयरटेकर नहीं होतीं, बल्कि वे बच्चियों के लिए मां जैसी भूमिका निभाती हैं। वार्डन्स ही विद्यालयों में शिक्षा, स्वच्छता और सुरक्षा के मूल्यों को स्थापित और सुदृढ़ करती हैं।
सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और नेतृत्व विकास पर विशेष जोर
कार्यशाला की विस्तृत जानकारी देते हुए एनआईईपीए की परियोजना निदेशक डॉ. सांत्वना मिश्रा ने बताया कि पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं की सुरक्षा एवं संरक्षण, नेतृत्व विकास, प्रभावी हॉस्टल प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक संवेदनशीलता, बाल अधिकार, आपातकालीन प्रबंधन तथा शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वार्डन्स की पेशेवर दक्षताओं को मजबूत करना और कस्तूरबा विद्यालयों में एक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और संवेदनशील आवासीय वातावरण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगी, जिनमें वित्तीय अनुशासन एवं बजट प्रबंधन, व्यक्तिगत स्वच्छता, मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं की समझ और लैंगिक सशक्तिकरण शामिल हैं। इन विषयों पर गतिविधि आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वार्डन्स को व्यवहारिक और गुणात्मक ज्ञान प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर जेईपीसी के प्रशासी पदाधिकारी एस.डी. तिग्गा, राज्य बालिका शिक्षा प्रभारी अनूपा तिर्की, एनआईईपीए की परियोजना निदेशक डॉ. सांत्वना मिश्रा, सीनियर प्रोजेक्ट सलाहकार डॉ. संध्या वैद्य, डॉ. रश्मी चौहान, डॉ. अंकिता दुबे सहित जेईपीसी के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

