प्राकृतिक के साथ संतुलन का संदेश पर भटका मानव : राजेन्द्र

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प्राकृतिक के साथ संतुलन का संदेश पर भटका मानव : राजेन्द्र


रांची, 09 अप्रैल (हि.स.)।

संवाद के रजत जयंती समारोह के दूसरे दिन गुरूवार को एसडीसी सभागार में विचार और संस्कृति का संगम देखने को मिला। इस अवसर पर बतौर अतिथि जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कोई बाहरी समस्या नहीं, बल्कि प्रकृति से टूटते रिश्ते का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देती रही है, लेकिन वर्तमान में हम उससे भटक गए हैं। समय रहते अपनी जड़ों की ओर लौटना आवश्यक है, अन्यथा संकट और गहरा सकता है।

मौके पर देशभर से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने देशज गणतंत्र की अवधारणा पर गहन मंथन किया। कार्यक्रम में सेमिनार, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय स्व-शासन, जलवायु संकट, आजीविका, आदिवासी संस्कृति संरक्षण और महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में आदिवासी कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चित्रकला प्रतियोगिता और कवि सम्मेलन ने युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया।

समारोह का विशेष आकर्षण पद्मश्री सिमोन उरांव के जीवन पर आधारित झरिया फिल्म का प्रदर्शन रहा। इस अवसर पर समाज सेवा और रचनात्मक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को नवाचार सम्मान से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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