जलवायु सहिष्णु उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड प्रभेदों के विकास पर शोध बढ़ाने की जरूरत : कुलपति

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जलवायु सहिष्णु उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड प्रभेदों के विकास पर शोध बढ़ाने की जरूरत : कुलपति


जलवायु सहिष्णु उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड प्रभेदों के विकास पर शोध बढ़ाने की जरूरत : कुलपति


रांची, 11 अप्रैल (हि.स.)। देश में मक्का उत्पादन, उत्पादकता बढ़ाने और बदलते जलवायु परिदृश्य में इसके क्षेत्र विस्तार की रणनीतियों पर चर्चा करने और उच्च उपज क्षमता वाली नयी किस्मों की पहचान करने के उद्देश्य से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में 09 से 11 अप्रैल तक आयोजित मक्का वैज्ञानिकों की तीनदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शनिवार को समाप्त हो गयी I

कार्यशाला के दौरान मक्का संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआइसीएआरपी) के तहत वर्ष 2025 के दौरान राज्यवार/ क्षेत्रवार उपलब्धियों की समीक्षा की गयी और अगले वर्ष के लिए अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम का रोडमैप तैयार किया गया I

देश में उत्पादित मक्का का लगभग 50 पशुओं के दाना-चारा में प्रयोग

समापन सत्र के मुख्य अतिथि बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने कहा एआइसीएआरपी के तहत निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हाइब्रिड प्रभेदों के विकास पर शोध प्रयास बढ़ाने की जरूरत है I उन्होंने 15 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन कंटेंट, बड़ा दाना आकार और अधिक स्टार्च वाले, जलवायु सहिष्णु और रोगरोधी प्रभेदों के विकास एवं रोगों-कीड़ों से बचाव के लिए क्व़ारेंटाइन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया I

कुलपति ने कहा कि देश में उत्पादित मक्का का लगभग 50 पशुओं के दाना-चारा में प्रयोग होता है और पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाने की अनुमति है I इसलिए मक्का उत्पादन बढाकर क्रूड आयात पर होनेवाले खर्च को अरबों डॉलर घटाया जा सकता है I उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर मक्का उत्पादन 02 से 05 क्विंटल है I उपज के इस गैप को कम करने के लिए प्रभावी प्रौद्योगिकी प्रसार कार्यक्रम की जरूरत है I

स्वीट कॉर्न, पॉप कॉर्न, बेबी कॉर्न के लिए 39 उन्नत प्रभेद चिन्हित : डॉ जाट

भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना के निदेशक डॉ एचएस जाट ने कहा कि देश में चल रहे सतत शोध प्रयासों के फलस्वरूप स्वीट कॉर्न, पॉप कॉर्न, बेबी कॉर्न, बायो फ्यूल पर्पस, बायोफोर्टीफायड किस्में मिलाकर मक्का के कुल 39 उन्नत प्रभेद देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए जारी करने के लिए चिन्हित किये गए, इनमें से 30 खरीफ मौसम के लिए हैं I रोगों, कीड़ों और नमी की कमी के प्रति सहिष्णु इन उच्च उपजशील प्रभेदों के विकास में 25 केंद्रों का योगदान रहा I

उन्होंने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनसे और कड़ी मेहनत करने का आग्रह किया I

इस अवसर पर आइसीएआर के सहायक महानिदेशक (खाद्य एवं चारा फसलें) डॉ एसके प्रधान, मक्का परियोजना सलाहकार और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ सैन दास, मक्का सम्बन्धी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के नोडल ऑफिसर डॉ सुनील नीलम एवं कार्यशाला की आयोजन सचिव डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती ने भी अपने विचार रखे I

मक्का अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में लम्बे समय तक विशिष्ट योगदान के लिए बीएयू के आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती तथा केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ आदित्य कुमार सिंह को सम्मानित किया गयाI

इस अवसर पर डॉ संतोष कुमार, डॉ भूपेंद्र कुमार एवं डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती ने संयुक्त रूप से मक्का फसल पर लिखी गयी पुस्तक का लोकार्पण किया I

कार्यक्रम में स्टार्च, फीड, एथेनॉल, बीज, कृषि रसायन, कृषि यंत्र से जुड़े उद्योगों के प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय एवं राज्य बीज निगमों के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों सहित देश के 37 कृषि विश्वविद्यालयों और आइसीएआर अनुसंधान संस्थानों के 250 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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