देश में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक से 1.4 करोड़ छात्रों का भविष्य लटका अधर में : कांग्रेस

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देश में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक से 1.4 करोड़ छात्रों का भविष्य लटका अधर में : कांग्रेस


रांची, 23 जून (हि.स.)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने देश में परीक्षाओं की बदहाली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसके कारण 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं।

यह बातें प्रदेश कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, प्रदेश मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, मीडिया संयोजक डॉ तौसीफ और प्रवक्ता सोनाल शांति ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त रूप से कही।

उन्होंने कहा कि एक अन्य अध्ययन के अनुसार, महज 05 वर्षों में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक हुए। इससे मात्र 01 लाख से कुछ अधिक पदों के लिए संघर्ष कर रहे करीब 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया, जबकि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में 03 से 10 साल की कैद और 10 लाख से 01 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का नियम है। इसके बावजूद राजस्थान सहित कई राज्यों में पेपर लीक नहीं रुके, जो यह दर्शाता है कि सिर्फ कानून बना देने से जमीन पर बदलाव नहीं आया।

पार्टी नेताओं ने कहा कि सिर्फ चार बड़ी परीक्षाओं में हुई धांधली के कारण 01 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए। नीट यूजी 2026 के लगभग 24 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुए और अब मामला सीबीआई जांच और उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। इसी तरह से यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024 पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द हुई, जिससे 48 लाख छात्र प्रभावित हुए। सीटेट 2021 पेपर लीक की वजह से 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों को झटका लगा। यूजीसी नेट 2024 परीक्षा होने के अगले ही दिन इसे रद्द करना पड़ा, जिससे 11 लाख छात्र प्रभावित हुए और दोबारा परीक्षा हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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