अबुआ दिशोम बजट होगा मजबूत और पब्लिक इंटरेस्ट का बजट : वित्त मंत्री
रांची, 15 जनवरी (हि.स.)। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अबुआ दिशोम बजट 2026-27 राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह झारखंड के रजत जयंती वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य ने अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस अवसर पर सरकार एक मजबूत, संतुलित एवं पब्लिक इंटरेस्ट से जुडे बजट देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि बजट को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से विशेषज्ञों, विभिन्न विभागों तथा हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने यह बातें गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित दो दिवसीय अबुआ दिशोम बजट 2026-27 बजट पूर्व गोष्ठी में कहीं।
वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच के अनुरूप राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी आगामी बजट में विशेष महत्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बजट की सफलता कंसल्टेशन, सजेशन और इम्प्लीमेंटेशन—इन तीन स्तंभों पर निर्भर करती है, तभी बजट का समुचित उपयोग संभव है।
बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने पर दिया जाएगा जोर : सुदिव्य
कार्यक्रम में नगर विकास और पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि इस वर्ष के बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा ताकि राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके और रोजगार को भी बढ़ावा मिले। साथ ही शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया जाएगा।
नए और नवाचारी विचारों को मिलेगा स्थान : शिल्पी
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आगामी बजट में नए और नवाचारी विचारों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा। अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने पर भी सरकार विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मिलेट्स मिशन को मड़ुवा क्रांति नाम दिया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव किसानों में दिख रहा है। इसके तहत किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही सिंचाई के लिए 5 एचपी सोलर आधारित वाटर पंप सेट देने की योजना है। उन्होंने केसीसी लोन में बैंक और एनजीओ की सक्रिय भागीदारी, ग्रामीण विकास, सिंचाई एवं अबुआ आवास योजना में पर्याप्त बजटीय प्रावधान पर जोर दिया।
मौके पर जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने सुझाव दिया कि बजट में 2.5 एकड़ में बने तालाबों के पुनरुद्धार, माइनर इरीगेशन और अन्य लघु परियोजनाओं पर विशेष प्रावधान करने की जरूरत है।
मध्यम और व्यवहारिक परियोजनाओं पर ध्यान देना अधिक उपयोगी : प्रशांत
पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि राज्य में कई सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। कई फ्लाइओवर बन कर तैयार हो गए हैं और कई पर काम चल रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष में कई नई परियोजनाओं को बजट में शामिल किया जाएगा।
वहीं वित्त सह जल संसाधन सचिव प्रशांत कुमार ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स के बजाय मध्यम और व्यवहारिक परियोजनाओं पर ध्यान देना अधिक उपयोगी होगा। उन्होंने लिफ्ट इरीगेशन आधारित खेती और छोटे तालाबों के जीर्णोद्धार को बजट में शामिल करने का सुझाव दिया।
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के श्रीनिवासन ने अबुआ आवास, प्रधानमंत्री आवास योजना, जेएसएलपीएस और मनरेगा के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य के सभी प्रखंडों में पलाश मार्ट की स्थापना का सुझाव दिया।
गोष्ठी में कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी, पर्यटन सचिव मनोज कुमार और श्रम विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह सहित राज्य और राज्य के बाहर से आए विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। कृषि, सिंचाई, भंडारण क्षमता विस्तार, पशुधन विकास, डेयरी, हॉर्टिकल्चर और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (आईएफएस) पर विशेष चर्चा की गई। वन विभाग से जुड़े विषयों पर विमर्श के दौरान बताया गया कि राज्य का 30 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन क्षेत्र हैं, जिसे ग्रीन इकोलॉजिकल सिस्टम के रूप में विकसित कर ग्रीन इंवेस्टमेंट को बढ़ावा दिया जा सकता है।
गोष्ठी में वित्त विशेषज्ञ हरिश्वर दयाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

