झारखंड में टाटा स्टील के साथ 11,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐतिहासिक समझौता

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झारखंड में टाटा स्टील के साथ 11,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐतिहासिक समझौता


-न्यू एज ग्रीन स्टील तकनीकों से हरित औद्योगिक भविष्य की ओर कदम

रांची, 20 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड ने विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में एक महत्वपूर्ण लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जो राज्य को सतत, कार्बन-न्यूट्रल औद्योगिक भविष्य की दिशा में ले जाने के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस साझेदारी में नीदरलैंड और जर्मनी की अत्याधुनिक तकनीकों को झारखंड में लागू किया जाएगा, जिससे राज्य हरित विनिर्माण में वैश्विक अग्रणी बन सके। इस अवसर पर टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) टी. वी. नरेंद्रन अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थे।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच हुआ यह समझौता न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जो राज्य को सतत, कार्बन-न्यूट्रल औद्योगिक भविष्य की ओर ले जाने के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस साझेदारी के तहत नीदरलैंड और जर्मनी की अत्याधुनिक नवाचार आधारित तकनीकों को झारखंड में लागू किया जाएगा, जिससे राज्य प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखते हुए हरित विनिर्माण के वैश्विक बदलाव में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।

अगली पीढ़ी की आयरनमेकिंग तकनीकों का सूत्रपात

झारखंड सरकार की ओर से बताया गया कि इस निवेश का प्रमुख आधार हिसारना और ईज़ीमेल्ट जैसी क्रांतिकारी आयरनमेकिंग तकनीकें हैं, जिनमें कुल 7,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। हिसारना तकनीक की खासियत यह है कि इसमें स्वदेशी कोयले और निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग संभव है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्टील उत्पादन अधिक किफायती बनेगा। यह तकनीक कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक कमी लाने की क्षमता रखती है। नीदरलैंड में सफल पायलट परियोजना के बाद, टाटा स्टील वर्ष 2030 तक जमशेदपुर में लगभग 10 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता का वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है।

वहीं ईज़ीमेल्ट (इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर) तकनीक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया की स्थिरता को और मजबूत बनाएगी। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला समाधान है, जिसमें सिनगैस का उपयोग कर कोक की खपत को कम किया जाता है और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मिलेगा नया आयाम

आयरनमेकिंग नवाचारों के अलावा, इस निवेश पैकेज में 1,500 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक कॉम्बी मिल और 2,600 करोड़ रुपये के टिनप्लेट विस्तार का भी प्रावधान किया गया है। यह समग्र औद्योगिक खाका आर्थिक मजबूती बढ़ाने, उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर सृजित करने और डी-कार्बोनाइजिंग वैश्विक अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इन पहलों से टाटा स्टील और झारखंड को बड़े पैमाने पर हरित आयरनमेकिंग तकनीक में फर्स्ट मूवर के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा।

पर्यावरण के साथ संतुलित विकास का मॉडल

झारखंड सरकार के लिए यह निवेश एक ऐसे भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का परिचायक है, जहां औद्योगिक प्रगति पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ेगी। इन टिकाऊ तकनीकों को अपनाकर राज्य आर्थिक विकास के एक नए युग की नींव रख रहा है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और तकनीकी उत्कृष्टता दोनों को समान महत्व देता है। यह पहल झारखंड के औद्योगिक विकास को समावेशी, जिम्मेदार और दीर्घकालिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

25 वर्षों की औद्योगिक यात्रा: खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से हरित नवाचार तक

राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ यह ऐतिहासिक समझौता झारखंड के बदलते औद्योगिक स्वरूप का प्रतीक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड पारंपरिक खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में अग्रसर है। इसी क्रम में झारखंड में टाटा समूह से जुड़े खनन और विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है।

बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन ने दावोस में मुख्यमंत्री की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है और राज्य को ऐसे वैश्विक व्यापारिक मंचों पर नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राज्य की आईटीआई संस्थाओं को रोजगार एवं बाज़ार उन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा, जिस पर कंपनी ने सहमति जताई।

इस अवसर पर टाटा समूह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज का आमंत्रण भी दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।-------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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