जेएसएससी-सीजीएल जांच पर बाबूलाल मरांडी के सवाल, बड़े नेटवर्क तक जांच पहुंचाने की मांग

WhatsApp Channel Join Now
जेएसएससी-सीजीएल जांच पर बाबूलाल मरांडी के सवाल, बड़े नेटवर्क तक जांच पहुंचाने की मांग


जेएसएससी-सीजीएल जांच पर बाबूलाल मरांडी के सवाल, बड़े नेटवर्क तक जांच पहुंचाने की मांग


रांची, 29 सितंबर (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी-सीजीएल मामले में चल रही सीआईडी जांच को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की कार्रवाई फिलहाल अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि कथित बड़े साजिशकर्ताओं और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

मरांडी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि विनोद सिंह के पास जेएसएससी-सीजीएल के एडमिट कार्ड मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन सीआईडी ने उनसे पूछताछ नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की बात सामने आने के बावजूद संबंधित व्यक्ति की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गिरिडीह इस कथित परीक्षा घोटाले का हॉटस्पॉट बनकर सामने आया है और वहां से कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं। हालांकि, उनके अनुसार, अब तक वहां के झामुमो नेताओं से पूछताछ नहीं हुई है। उन्होंने इसे लेकर जांच के दायरे और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से सवाल किया कि इतने बड़े कथित परीक्षा घोटाले में केवल अभ्यर्थियों और एजेंटों को जिम्मेदार मानना कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि छात्रों और आम लोगों का भरोसा जांच पर तभी कायम होगा, जब कार्रवाई केवल छोटे स्तर के आरोपितों तक सीमित न रहे और कथित पूरे नेटवर्क तथा जिम्मेदार लोगों तक जांच पहुंचे।

बाबूलाल मरांडी ने अनुराग गुप्ता, सुधीर गुप्ता, नीरज सिन्हा, मनोज कौशिक, प्रशांत कुमार और विनोद सिंह की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से सवाल उठाया कि प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तथा उन्हें पद पर बनाए रखने की क्या वजह है।

भाजपा नेता ने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल मामले को लेकर आम लोगों और अभ्यर्थियों के बीच कई सवाल और जिज्ञासाएं हैं। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच पर भरोसा तभी मजबूत होगा, जब उसकी पहुंच केवल छोटे आरोपितों तक सीमित रहने के बजाय मामले से जुड़े सभी स्तरों और जिम्मेदार लोगों तक हो।

मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि जांच का दायरा व्यापक नहीं किया गया, तो लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि कार्रवाई भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल औपचारिकता तक सीमित है। उन्होंने सरकार से जांच की दिशा और दायरे को स्पष्ट करने की मांग की।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

Share this story