मुख्यमंत्री सारथी योजना का हाल बेहाल : युवाओं को रोजगार देने में विफल हेमंत सरकार : शोभा
रांची, 22 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने मुख्यमंत्री सारथी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए हेमंत सरकार को युवा विरोधी बताया है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ कितने युवाओं तक पहुंच रहा है, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। कई कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन पर उठ रहे सवाल युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।
शोभा यादव ने गुरुवार काे प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि चुनाव के समय युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार उन वादों की जवाबदेही से बचती नजर आती है।
मुख्यमंत्री सारथी योजना का उद्देश्य युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। जुलाई 2023 में योजना के पहले चरण के तहत 80 प्रखंड स्तरीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की शुरुआत की गई थी।
योजना में प्रशिक्षण के बाद रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में पात्र युवाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान रखा गया था। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि इन संस्थानों की वर्तमान स्थिति क्या है और कितने युवाओं को वास्तव में स्थायी रोजगार मिला है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2024 में राज्य के श्रम एवं कौशल विकास विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, लगभग 5.25 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था, जिनमें 4.5 लाख को प्रमाणपत्र मिले और करीब 2.25 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। सवाल यह है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शेष युवाओं की स्थिति क्या है।
कितने युवा आज भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और कितनों को उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरी मिली है। सरकार को इन सवालों का जवाब सार्वजनिक आंकड़ों के साथ अब तक नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर लेना और वास्तविक रोजगार हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि कोई युवा महीनों तक प्रशिक्षण लेने के बाद भी बेरोजगार रहता है, तो उसके लिए योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

