सत्पुरुष का सबसे बड़ा धन उसके श्रेष्ठ कर्म होते हैं : ब्रह्माकुमारी

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सत्पुरुष का सबसे बड़ा धन उसके श्रेष्ठ कर्म होते हैं : ब्रह्माकुमारी


रांची, 29 मार्च (हि.स.)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान (हरमू रोड) रांची में रविवार को आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम में श्रेष्ठ कर्म, सकारात्मक सोच और नए संकल्पों पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर केन्द्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने कहा कि सत्पुरुष का सबसे बड़ा धन उसके श्रेष्ठ कर्म होते हैं। मनुष्य अपने सद्व्यवहार, विनम्रता और परोपकार के माध्यम से पुण्य अर्जित करता है, जिससे उसे परमात्मा से अद्वैत सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि नई और सुखमय सृष्टि की रचना नए संकल्पों और सकारात्मक विचारों से होती है, जो परमपिता परमात्मा से प्राप्त होते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानव पुराने विचारों और समस्याओं से घिरा हुआ है, जिसके कारण तनाव और कलह बढ़ रहे हैं। ऐसे में समाज के कल्याण के लिए सकारात्मक सोच अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

ब्रह्माकुमारी निर्मला ने कहा कि सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक स्तर पर नए संकल्पों से ही क्रमशः समाज, शासन व्यवस्था और मानव आत्मा का उत्थान संभव है। उन्होंने बताया कि ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से मानव के संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन आता है, जिससे जीवन संयमित और मर्यादित बनता है।

कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र में प्रतिदिन प्रातः 7 बजे से 9:30 बजे तक तथा संध्या 4 बजे से 6 बजे तक तनाव मुक्ति के लिए मेडिटेशन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका लाभ आमजन उठा सकते हैं।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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