होटवार में साइबर अपराध अनुसंधान पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू,सिखाई जाएंगी आधुनिक जांच तकनीकें
रांची, 08 जून (हि.स.)। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और पुलिस अधिकारियों की जांच क्षमता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से होटवार स्थित अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय में सोमवार से साइबर अपराध का अनुसंधान विषय पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस प्रशिक्षण में झारखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए 78 पुलिसकर्मी और अधिकारी भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिन्हा ने किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराधों का स्वरूप लगातार बदल रहा है और अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के लिए आधुनिक तकनीकी ज्ञान और साइबर अनुसंधान कौशल से लैस होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की जांच अब केवल पारंपरिक पुलिसिंग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके लिए डिजिटल तकनीकों, डेटा विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन समझ भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, ताकि पुलिसकर्मियों को नवीनतम तकनीकों और जांच प्रक्रियाओं की जानकारी मिल सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से आए तीन अनुभवी प्रशिक्षक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल पेमेंट से संबंधित धोखाधड़ी, घटनास्थल से डिजिटल साक्ष्य का संग्रहण और संरक्षण, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले अपराधों की जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) एवं इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) का विश्लेषण, डार्क वेब की कार्यप्रणाली तथा क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों की जांच जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए आरक्षी, सहायक अवर निरीक्षक, अवर निरीक्षक और पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें साइबर अपराधों की पहचान, तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण और डिजिटल जांच प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी भी दी जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों की प्रभावी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही इससे पुलिस बल की तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी और आधुनिक डिजिटल अपराधों से निपटने की क्षमता भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, सोशल मीडिया अपराध, साइबर ठगी और डिजिटल पहचान चोरी जैसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे बदलते साइबर अपराध परिदृश्य के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

