हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा साहिब में सजा विशेष दीवान

WhatsApp Channel Join Now
हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा साहिब में सजा विशेष दीवान


रांची, 30 जून (हि.स.)। गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा की ओर से रातु रोड स्थित कृष्णा नगर कॉलोनी के गुरुद्वारा साहिब में मंगलवार को सिख पंथ के छठे नानक श्री हरगोबिंद साहिब जी का पावन प्रकाश पर्व मनाया गया।

इस उपलक्ष्य में सत्संग सभा की ओर से सजाए गए विशेष दीवान की शुरुआत सुबह में हुई। हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी ने वडी आरजा हरि गोबिंद की सूख मंगल कलिआण बीचारिआ...और दीन दुनी दा पातशाह पातशाहां पातशाह अडोला...एवं जमया पूत भगत गोबिंद का परगटिया सब महि लिखिआ धुर का...शबद गायन कर साध संगत को गुरबाणी से जोड़ा।

गुरु घर के सेवक मनीष मिड्ढा ने साध संगत के साथ गुरमत विचार सांझा करते हुए गुर इतिहास की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी का जन्म 1595 में पंजाब के अमृतसर ज़िले में हुआ था। अपने पिता गुरु अर्जुन देव जी की शहादत के बाद उन्होंने 1606 ई में गुरुगद्दी संभाली।

उन्होंने क्रांतिकारी सिद्धांत मीरी (लौकिक/राजनीतिक शक्ति) और पीरी (आध्यात्मिक अधिकार) की शुरुआत की, जिसे उन्होंने दो अलग-अलग तलवारें धारण करके प्रतीकात्मक रूप से प्रदर्शित किया। अत्याचार के खिलाफ न्याय और आस्था की रक्षा की आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने सिख समुदाय को एक योद्धा और आध्यात्मिक शक्ति में बदल दिया, जिससे संत-सिपाही के आदर्श की नींव रखी गई।

बंदी छोड़ दिवस का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी को जहांगीर ने ग्वालियर के किले में कुछ समय के लिये कैद कर लिया था, जब उन्हें रिहा करने की पेशकश की गई, तो उन्होंने 52 कैदी राजाओं को अपने साथ रिहा किये बिना जाने से इनकार कर दिया। इस ऐतिहासिक मुक्ति को प्रतिवर्ष बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।

साथ ही बताया कि धर्मनिरपेक्ष और राजनीतिक मामलों के संचालन के लिये उन्होंने 1609 में अकाल तख्त का निर्माण कराया। अमृतसर में हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के ठीक सामने बना यह स्थान सिख धर्म में लौकिक अधिकार के रूप में सर्वोच्च बना हुआ है। छह पौढ़ी श्री अनंद साहिब जी के पाठ अरदास हुकुमनामा और कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ दीवान की समाप्ति हुई।

सत्संग सभा के अध्यक्ष अर्जुन देव मिड्ढा और सचिव सुरेश मिड्ढा ने समूह साध संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी और इसी तरह गुरु घर से जुड़े रहने को कहा। दीवान की समाप्ति के बाद सभा ने गुरु का अटूट लंगर चलाया।

दीवान में पूर्व पार्षद देवराज खत्री, द्वारका दास मुंजाल, हरगोबिंद सिंह, अमरजीत गिरधर, सुंदर लाल मिड्ढा, नरेश पपनेजा, अशोक गेरा, मोहन लाल अरोड़ा, बसंत काठपाल, सुभाष मिड्ढा, रमेश पपनेजा, इंदर मिड्ढा, अशोक मुंजाल, मोहन काठपाल, महेश सुखीजा, कंवलजीत मिड्ढा, हरीश मिड्ढा, रमेश गिरधर सहित अन्य शामिल थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

Share this story