डहरे सोहराय यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, दिखी झारखंडी संस्कृति
रांची, 04 नवंबर (हि.स.)। डहरे सोहराय पर्व के अवसर पर बुधवार को मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक भव्य सांस्कृतिक यात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम में जुटे लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य-संगीत, ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों से सजी इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
अल्बर्ट एक्का चौक पर आयोजित सांस्कृतिक मंच कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिली।
इस अवसर पर झारखंड केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सोहराय झारखंड का महत्वपूर्ण लोक-सांस्कृतिक महापर्व है। यह पर्व पशुधन के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति के साथ मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सोहराय में गाय, बैल और बकरी सहित पशुओं को स्नान कराकर सजाया जाता है।
उनके सींगों में तेल और सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद पारंपरिक गीत-संगीत और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया जाता है। गुड़ रोटी, शेलका रोटी और खापरा पीठा जैसे पारंपरिक पकवान भी इस पर्व की विशेष पहचान हैं। उन्होंने सोहराय को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, प्रकृति प्रेम और पशुधन के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में महिपाल महतो, जगत पाल महतो, अजीत महतो, हरेंद्र महतो, ऋषि महतो, बसंत कुमार महतो, शीतल अखदार, किरण देवी और पार्वती देवी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

