पितरों को पानी देने शिवगंगा पहुंचे वंश के लोग
देवघर, 25 सितंबर (हि.स.)। पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने की परंपरा के तहत शुक्रवार को 12 श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ मंदिर स्थित शिवगंगा पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने काशी फूल, कुश, तिल एवं फल के माध्यम से अपने पूर्वजों को तर्पण अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। इसके साथ ही शिवगंगा में पितृपक्ष को लेकर श्रद्धालुओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है।
पितृपक्ष की मुख्य श्राद्ध तिथियां 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेंगी। वहीं 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृपक्ष की शुरुआत होगी। इससे पहले शिवगंगा में 24 से 26 सितंबर तक ऋषि तर्पण की परंपरा निभाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, 24 सितंबर को प्रथम ऋषि तर्पण के तहत अगस्त्य ऋषि को काशी फूल, कुश, तिल और फल के माध्यम से तर्पण किया गया। 25 सितंबर को द्वितीय ऋषि तर्पण में शंख के माध्यम से, जबकि 26 सितंबर को तृतीय ऋषि तर्पण में घट के माध्यम से तर्पण करने की परंपरा है।
मौके पर संजय महाराज ने बताया कि 27 सितंबर को प्रतिपदा, 28 सितंबर को द्वितीया और 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध और तर्पण होगा। 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध पड़ेंगे। इसके बाद ०1 अक्टूबर को षष्ठी, ०2 अक्टूबर को सप्तमी, ०3 अक्टूबर को अष्टमी, ०4 अक्टूबर को नवमी, ०5 अक्टूबर को दशमी, ०6 अक्टूबर को एकादशी, ०7 अक्टूबर को द्वादशी, ०8 अक्टूबर को त्रयोदशी और ०9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध एवं तर्पण होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार तर्पण को देव तर्पण, ऋषि तर्पण, दिव्य मानव तर्पण, दिव्य पितृ तर्पण, यम तर्पण और मनुष्य पितृ तर्पण सहित विभिन्न भागों में विभाजित किया गया है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त जल, तिल, कुश, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर उनका स्मरण करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण उन्हें समर्पित स्मरण और श्रद्धा का प्रतीक है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु शिवगंगा पहुंचकर अपने पितरों के लिए जल अर्पित कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy

