कृषि विभाग और आत्मा की योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनें किसान : शशांक

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कृषि विभाग और आत्मा की योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनें किसान : शशांक


देवघर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। जिला के मधुपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढई के ग्राम भिखनाडीह एवं बाराटांड में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), कृषि विभाग के तत्वावधान में खेत बचाओ अभियान’ के तहत रविवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और दलहन एवं तिलहन फसलों की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना था।

कार्यक्रम में बीटीएम शशांक शेखर की ओर से खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर बल दिया गया। उन्होंने किसानों को फसल उत्पादन में सुधार, कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान तथा उपलब्ध कृषि तकनीकों का समुचित उपयोग करने के संबंध में महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने किसानों को कृषि विभाग एवं आत्मा की योजनाओं एवं तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ उठाकर खेती को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जैविक खाद एवं अन्य उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग तथा कृषि लागत को कम करने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने फसलों में लगने वाले कीटों की पहचान, कीट प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों और आवश्यकतानुसार समेकित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की जानकारी दी।

कार्यक्रम में दलहन और तिलहन फसलों की खेती से संबंधित उपयोगी तकनीकी जानकारी प्रदान की। उन्होंने इन फसलों के महत्व, उपयुक्त बीजों के चयन, वैज्ञानिक खेती पद्धति एवं बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए आवश्यक कृषि प्रबंधन संबंधी पहलुओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया।

वहीं, मृदा नमूना संग्रहण एवं मिट्टी की जांच के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जा सकता है और आवश्यकतानुसार उर्वरकों का उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च को कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन में सुधार करने में सहायता मिलती है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का नमूना एकत्र कर जांच कराने तथा प्राप्त मृदा स्वास्थ्य संबंधी सुझावों के अनुसार खेती करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को बताया मृदा में 17 प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं जिसमें कुछ अति आवश्यक पोषक तत्व होते हैं तथा कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं सभी की उपलब्धता मिट्टी में आवश्यक है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को कृषि की आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी लाने तथा खेती को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कीट प्रबंधन तथा दलहन एवं तिलहन फसलों की वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

मौके पर एग्री क्लीनिक मधुपुर के समन्वयक सज्जाद आलम, विजय कुमार, राजगोपाल तिवारी, अविनाश कुमार और कृषक मित्र बनवारी प्रसाद यादव, बीना देवी, नाजीर दास के साथ-साथ सैकड़ो महिला- पुरुष किसान उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy

Livevns.news Desk
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