चर्च परिसर में करम पूजा करने के कथित मामले पर सरना समिति ने की कार्रवाई की मांग
रांची, 16 सितंबर (हि.स.)। चर्च परिसर में आदिवासियों का पर्व करम पूजा करने पर आदिवासी समुदाय ने आपत्ति जताई है। आदिवासी समाज ने मामले को लेकर जिला प्रशासन से अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है।
साथ ही इस प्रकार की गतिविधियों पर भविष्य में रोक लगाने को कहा है। केंद्रीय सरना समिति के प्रदेश अध्यक्ष बबलू मुंडा ने उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को बुधवार को पत्र लिखकर कहा है कि जनजातियों के आराध्य करम देवता और सरहुल जैसे त्योहारों को ख्रीस्तीय उपासना पद्धति के अनुकूल चर्च गिरजाघरों में गुप्त और अवध तरीके से मनाया जा रहा है। इसपर रोक लगना चाहिए।
बबलू मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के आराध्य करम देवता और सरहुल जैसे पर्व आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था, संस्कृति, रूढ़ि, परंपरा और पूजा पद्धति से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर इन्हें चर्च में अलग धार्मिक उपासना पद्धति के अनुरूप मनाया जा रहा है, जो आदिवासी समाज के लिए आपत्तिजनक है।
समिति ने आरोप लगाया कि आदिवासी पर्व-त्योहारों को उनकी पारंपरिक पूजा पद्धति से अलग तरीके से मनाने से समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होती है।
बबलू मुंडा ने कहा कि करम पूजा आदिवासी समाज के लिए आस्था और सामूहिक उल्लास का पर्व है, जिसमें परिवार और समाज के लोग मिलकर पूजा, नृत्य और संगीत करते हैं।
उन्होंने कहा कि समिति आदिवासी पर्व-त्योहारों के ऐसे आयोजनों का विरोध करती है, जिन्हें उनकी पारंपरिक मान्यताओं से अलग तरीके से मनाया जा रहा है। समिति ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले की जांच कर चर्च, गिरजाघरों या अन्य स्थानों पर करम देवता एवं सरहुल से जुड़े कथित आयोजनों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

