रांची में धूमधाम से मनाया गया सरहुल, मुख्य पाहन ने की अच्छी बारिश और भरपूर फसल की भविष्यवाणी

WhatsApp Channel Join Now
रांची में धूमधाम से मनाया गया सरहुल, मुख्य पाहन ने की अच्छी बारिश और भरपूर फसल की भविष्यवाणी


रांची में धूमधाम से मनाया गया सरहुल, मुख्य पाहन ने की अच्छी बारिश और भरपूर फसल की भविष्यवाणी


रांची में धूमधाम से मनाया गया सरहुल, मुख्य पाहन ने की अच्छी बारिश और भरपूर फसल की भविष्यवाणी


रांची में धूमधाम से मनाया गया सरहुल, मुख्य पाहन ने की अच्छी बारिश और भरपूर फसल की भविष्यवाणी


रांची, 21 मार्च (हि.स.)। राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राजधानी के सरना स्थल पर मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने विधि-विधान के साथ प्रकृति, पूर्वजों और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की।

सरना स्थल पर पारंपरिक रीति से रखे गए दो घड़ों के पानी का आकलन कर पाहन जगलाल पाहन ने इस वर्ष अच्छी बारिश और बेहतर खेती होने की भविष्यवाणी की। पूजा के दौरान विभिन्न मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग रंग के मुर्गों की बलि दी गई। सफेद मुर्गा भगवान सिंगबोंगा को, रंगवा मुर्गा जल देवता इकिर बोंगा को, रंगली मुर्गा पूर्वजों को और काला मुर्गा अनिष्ट शक्तियों की शांति के लिए अर्पित किया गया।

पूजा के बाद घड़े के पानी से पाहन को स्नान कराया गया और उनके चरण धोए गए। इसके बाद उन्होंने पूरे विश्व के लोगों, जीव-जंतुओं और प्रकृति की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। पाहन ने कहा कि इस वर्ष खेती-बाड़ी अच्छी होगी और प्रकृति अनुकूल रहेगी।

पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, जब विज्ञान का विकास नहीं हुआ था, उस समय आदिवासी समुदाय प्रकृति के संकेतों के आधार पर मौसम और मानसून का अनुमान लगाता था। यह परंपरा आज भी उसी आस्था के साथ निभाई जा रही है।

उन्होंने बताया कि सरहुल पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन लोग उपवास रखते हैं और सुबह खेतों व जलाशयों में जाकर केकड़ा और मछली पकड़ते हैं। पूजा के बाद इन्हें सुरक्षित रखा जाता है। मान्यता है कि फसलों की बोआई के समय केकड़े को गोबर पानी से धोकर उसी पानी में बीज भिगोकर खेतों में डालने से फसल अच्छी होती है। केकड़े के कई पैरों की तरह फसल की जड़ें भी मजबूत और अधिक होती हैं, जिससे भरपूर पैदावार होती है।

उन्होंने बताया कि पहले धरती पर पानी ही पानी था। केकड़े ने मिट्टी बनाई और धरती वर्तमान स्वरूप में आया। उन्होंने कहा कि कितना भी अकाल पड़ जाएं, जहां केकड़ा होगा वहां संकेत है कि पानी जरूर होगा।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, बबलू मुंडा, दीपक हेमरोम, रौशन हेमरोम, कुलदीप हेमरोम और अंतो हेमरोम सहित अन्य लोग शामिल थे।------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

Share this story