रामगढ़ महाविद्यालय में प्रेमचंद के साहित्य और लेखन शैली पर शोध विमर्श

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रामगढ़ महाविद्यालय में प्रेमचंद के साहित्य और लेखन शैली पर शोध विमर्श


रामगढ़ महाविद्यालय में प्रेमचंद के साहित्य और लेखन शैली पर शोध विमर्श


रामगढ़, 10 सितंबर (हि.स.)। रामगढ़ महाविद्यालय में गुरुवार को बहुविषयक शोध विमर्श की साप्ताहिक श्रृंखला ‘प्रमा’ की आठवीं कड़ी के तहत प्रेमचंद की लेखन शैली पर विशेष शोध प्रस्तुति आयोजित की गई। कार्यक्रम में उर्दू विभागाध्यक्ष सह असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शाहनवाज खान ने पीपीटी के माध्यम से स्मार्ट बोर्ड पर ‘प्रेमचंद की लेखन-शैली’ विषय पर अपने शोध विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद की तस्वीर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बिमल कुमार मिश्रा ने माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया। इस दौरान प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता और उनके मानवीय सरोकारों पर चर्चा हुई।

प्राचार्य डॉ बिमल कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं। उनकी कहानियों में आम जनजीवन की भावनाओं, परिस्थितियों और समस्याओं का जीवंत चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मशीनीकरण के दौर में पारिवारिक और मानवीय संवेदनाओं में कमी चिंता का विषय है। वृद्ध माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ने की प्रवृत्ति के संदर्भ में उन्होंने प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘ईदगाह’ का उदाहरण देते हुए कहा कि नन्हे हामिद द्वारा अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदना त्याग, धैर्य और प्रेम का अत्यंत मार्मिक संदेश देता है।

डॉ शाहनवाज खान ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी और उर्दू दोनों साहित्य के महत्वपूर्ण साहित्यकार थे और उर्दू के शुरुआती प्रमुख अफसाना निगारों में उनका विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखन शैली ने ही उनके साहित्यिक संदेशों को प्रभावकारी बनाया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने जिन विषयों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया, जिन सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण किया और जिन संदेशों को समाज तक पहुंचाया, वे विषय अन्य कहानीकारों के साहित्य में भी दिखाई देते हैं। प्रेमचंद को विशिष्ट बनाने वाली सबसे बड़ी विशेषता उनकी प्रभावशाली और जनसरोकारों से जुड़ी लेखन शैली थी। इसी शैली ने उनके साहित्य को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाया और उन्हें श्रेष्ठ साहित्यकारों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया।

प्रमा कार्यक्रम में उर्दू विभाग की छात्रा उम्मे सलमा ने ‘प्रेमचंद की कथाओं के मजमून और पैगाम’ विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने ग्रामीण जीवन, किसानों और मजदूरों की समस्याओं, मध्यम और निम्न वर्ग के संघर्षों तथा छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया। उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए डॉ शाहनवाज खान और छात्रा उम्मे सलमा की सराहना करते हुए प्राचार्य डॉ बिमल कुमार मिश्रा ने उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किया।

कार्यक्रम का संचालन ‘प्रमा’ की समन्वयक सह संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति कमल ने किया।

शोधपरक कार्यक्रम में स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के अलावा डॉ कामना राय, रोज उरांव, डॉ रामाज्ञा सिंह, डॉ मालिनी डीन, डॉ बलवंती मिंज, डॉ राहुल कुमार, डॉ संगीता बारला, डॉ शालिनी प्रकाश, डॉ नीतू मिंज, साजिद हुसैन एवं बीरबल महतो सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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