हड़िया-दारू की दुनिया से निकल कर रंजू लिख रही सफलता की कहानी
रामगढ़, 24 मार्च (हि.स.)। आदिवासी समाज अपने परिवार को संवारने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। ऐसे ही हड़िया दारू के बेचने से छुटकारा पाकर रंजू देवी सफलता की कहनी लिख रही हैं। जिले के मांडू प्रखण्ड अंतर्गत तोपा गांव की निवासी रंजू देवी का जीवन कभी अभावों और सामाजिक उपेक्षा के बीच बीत रहा था। परिवार के भरण-पोषण के लिए उनके पति दिन-रात मेहनत करते थे। फिर भी घर की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थी।
रंजू देवी के जीवन में नया मोड़ तब आया जब वर्ष 2016 में उन्होंने नव जागृति महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी। समूह की साप्ताहिक बैठकों में उन्हें फूलो-झानो योजना के बारे में पता चला। इसके तहत 50,000 रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिलता है, जो उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था।
समूह की दीदियों के प्रोत्साहन और फूलो-झानो योजना के लाभ से प्रेरित होकर रंजू ने सबसे पहले समूह से 10,000 रुपये का कर्ज लिया। इससे उन्होंने गांव के पास ही फास्ट फूड का स्टॉल लगाना शुरू किया। इसके बाद काम को विस्तार देने के लिए उन्होंने दूसरा कर्ज 20,000 रुपये, कुल 30,000 रुपये का ऋण लिया और सभी प्रकार के फ़ास्ट फूड का स्टॉल शुरू कियाी। अब उनका स्टॉल पूरी तरह से जम चुका था और लोग उनके बनाए चाउमीन, समोसे और अन्य पकवानों के स्वाद के कायल होने लगे थे।
रंजू देवी की मेहनत और ईमानदारी का फल जल्द ही मिलने लगा। वे अब हर महीने 12,000 से 15,000 रुपये की आय प्राप्त कर रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

