रक्षा राज्य मंत्री के प्रयास से रांची–टाटा मार्ग को मिलेगी नई रफ्तार, 214.79 करोड़ की ओवरले परियोजना को मिली स्वीकृति
रांची, 14 जून (हि.स.)। झारखंड के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल रांची–महुलिया (टाटा) खंड, राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (पूर्व एनएच-43 एवं एनएच-18) के सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्विकास के लिए लगभग 126.497 किलोमीटर लंबी ओवरले परियोजना को 214.79 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद रांची और जमशेदपुर के बीच आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित और आरामदायक होने की उम्मीद है।
इस परियोजना को रांची के सांसद और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के सतत प्रयासों और पहल का परिणाम बताया जा रहा है। उन्होंने रांची–टाटा मार्ग की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसके सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता को लगातार संबंधित मंत्रालयों के समक्ष उठाया था।
परियोजना की स्वीकृति पर संबंधित पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन 18 जून को प्रस्तावित है, जिसके बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कर इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना झारखंड के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।
रांची–महुलिया मार्ग राज्य की राजधानी रांची को औद्योगिक नगरी जमशेदपुर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण परिवहन गलियारा है। इस मार्ग पर प्रतिदिन भारी वाणिज्यिक वाहनों, यात्री बसों, खनिज ढुलाई वाहनों और स्थानीय यातायात का व्यापक दबाव रहता है। लगातार भारी यातायात, मानसून के दौरान जलभराव तथा सड़क की बढ़ती आयु के कारण कई स्थानों पर सड़क की सतह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है।
प्रस्तावित कार्य के तहत क्षतिग्रस्त बिटुमिनस सतह की मिलिंग कर उसे हटाया जाएगा। इसके बाद आवश्यक सुदृढ़ीकरण कर डेंस बिटुमिनस मैकाडम (डीबीएम) और बिटुमिनस कंक्रीट (बीसी) की नई परत बिछाई जाएगी। इससे सड़क की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, यात्रा समय में कमी आएगी तथा सड़क सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा।
यह परियोजना खनिज परिवहन, औद्योगिक उत्पादों और अंतरराज्यीय आवागमन के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रांची–टाटा कॉरिडोर झारखंड को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद इस मार्ग पर यातायात अधिक निर्बाध और सुगम हो सकेगा।
मथुरा स्थित मेसर्स एसआरएससी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को यह कार्य दो पैकेजों में कुल 214.79 करोड़ रुपये की लागत से आवंटित किया गया है। निर्माण कार्य भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों, तकनीकी विनिर्देशों और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

