पतरातु की बिजली से झारखंड होगा रौशन, इंडस्ट्री की लगेगी बाढ़ : सीईओ

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रामगढ़, 27 जून (हि.स.)। पतरातू विद्युत ऊर्जा निगम लिमिटेड से बनने वाली बिजली से पूरा झारखंड रोशन होगा। झारखंड में जब पर्याप्त बिजली होगी तो यहां इंडस्ट्री की भरमार भी होगी, क्योंकि हर उद्योग को बिजली चाहिए। यह बातें शनिवार को पीवीयूएनएल के सीईओ अशोक कुमार सेहगल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने बताया कि अगले 04 दिनों के बाद झारखंड में इन्वेस्टर मीट होने वाला है। अगर झारखंड सरकार उद्योग लगाने वालों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम है तो यहां इंडस्ट्री की भी कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि पहली यूनिट के शुरू होते ही राजधानी रांची में बिजली कटौती की समस्या खत्म हो गई है। दूसरी यूनिट की बिजली की रोशनी पूरे झारखंड में दिखाई देगी। जल्द ही तीसरी यूनिट का सीओडी प्लान किया गया है। पीवीयूएनएल जितनी भी बिजली बनाएगी उसका 85 प्रतिशत झारखंड में ही उपयोग होना है। इसका सीधा फायदा झारखंडवासियों को ही मिलेगा।

सीईओ ने कहा कि बिजली बनाना और व्यापार करना एक अलग मुद्दा है। लेकिन पीवीयूएनएल समाज में बदलाव कैसे हो इस पर ज्यादा ध्यान देती है। आज भले ही बेहद कम जगह में पीवीयूएनएल की स्थापना हुई है, लेकिन पतरातू क्षेत्र और रामगढ़ के विकास में अमूल चूल परिवर्तन दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश से क्राफ्ट बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल शुरू की गई है। महिलाएं बेहद जल्द झारक्राफ्ट में अपने उत्पाद बनाकर प्रस्तुत करेंगी।

पीवीयूएनएल गर्ल्स एंपावरमेंट मिशन चल रही है। इस मिशन के तहत बच्चियां 21 दिन तक लगातार प्रशिक्षण ग्रहण करती हैं।

सीईओ एके सहगल ने बताया कि झारखंड में ट्रांसफार्मर रिपेयर सिस्टम नहीं होने की वजह से बिजली व्यवस्था बेहद खराब है। मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव के बाद पीवीयूएनएल ने 20 लोगों को प्रशिक्षण दिलाने के लिए टाटा वर्कशॉप में भेजा है। उन्हें हर महीने 9000 और अन्य खर्च दिए जा रहे हैं। यह ट्रेनिंग लगातार चलती रहेगी और जल्द ही झारखंड में एक ट्रांसफॉर्मर रिपेयर सेंटर स्थापित होगा जिससे यहां खराब ट्रांसफार्मर को तत्काल रिप्लेस करने में दिक्कत नहीं आएगी।

सीईओ एके सहगल ने बताया कि बालू को रिप्लेस कर फ्लाई ऐश का उपयोग करने के लिए भी लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं। कंपनी ने फ्लाई ऐश के सैंपल भी सीमेंट फैक्ट्री और अन्य संस्थाओं में भेजे हैं। उनकी रिपोर्ट भी सकारात्मक आई है। उन्होंने बताया कि 50 फ़ीसदी बालू को रिप्लेस कर फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा सकता है। इससे बालू किल्लत खत्म होगी। साथ ही सीमेंट का दाम भी नहीं बढ़ेगा। इसके अलावा ईंट बनाने में मिट्टी के उपयोग को कम कर उसमें फ्लाई ऐश का उपयोग को लेकर भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ये तीन चीजें भवन निर्माण में आने वाली खर्च को कम कर देगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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