आंतरिक बुराइयों पर विजय ही देवी शक्ति का वास्तविक संदेश: ब्रह्माकुमारी निर्मला

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आंतरिक बुराइयों पर विजय ही देवी शक्ति का वास्तविक संदेश: ब्रह्माकुमारी निर्मला


रांची, 17 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्र के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के हरमू रोड स्थित चौधरी बगान सेवा केंद्र की केंद्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने कहा कि देवी शक्ति का वास्तविक संदेश केवल आसुरी शक्तियों के संहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य मनुष्य के भीतर मौजूद बुराइयों, नकारात्मक विचारों और दुर्गुणों पर विजय प्राप्त करना है।

निर्मला बहन ने कहा कि देवी-देवताओं द्वारा आसुरी शक्तियों का संहार ज्ञान, साधना और शक्ति के प्रतीक के रूप में समझा जाना चाहिए। यह बुराइयों पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी आध्यात्मिक ज्ञान और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की कमजोरियों को दूर कर सकता है। लाखों ब्रह्माकुमारी बहनें इसी उद्देश्य के साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और समाज में आध्यात्मिकता का संदेश फैलाने के लिए प्रयासरत हैं।

ब्रह्माकुमारी निर्मला ने आध्यात्मिकता, नारी शक्ति और राजयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नियमित राजयोग अभ्यास से मनुष्य में आत्मबल और आंतरिक शक्तियों का विकास होता है। इससे व्यक्ति को तनाव, चिंता, शोक और जीवन की विभिन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है। आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति को आत्मचिंतन करने, मन को शांत रखने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने लोगों से आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सुख और शांति की स्थापना के लिए मनुष्य को अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता और दुर्गुणों को दूर करने का प्रयास करता है, तभी परिवार और समाज में भी सकारात्मक वातावरण बनाने में योगदान दे सकता है।

निर्मला बहन ने बताया कि चौधरी बगान सेवा केंद्र की ओर से 21 से 25 अक्टूबर तक निःशुल्क राजयोग ज्ञान शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में प्रतिभागियों को सुबह सात बजे से दस बजे तक तथा शाम साढ़े तीन बजे से साढ़े छह बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पवित्रता की रक्षा करना सुख और शांति की स्थापना के लिए प्रत्येक व्यक्ति का पहला कर्तव्य है। इसे केवल विचारों तक सीमित रखने के बजाय जीवन और व्यवहार में आत्मसात करने की आवश्यकता है। ---------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

Livevns.news Desk
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