झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, राफिया बोलीं- ‘गूंज’ में युवाओं का दर्द क्यों नहीं?

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झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, राफिया बोलीं- ‘गूंज’ में युवाओं का दर्द क्यों नहीं?


रांची, 23 अगस्त (हि.स.)। झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों से हेमंत सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। इसी दौरान अमीषा प्रसाद, सबिता सहित कई छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट की गई।

राफिया नाज़ ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार करने की इजाजत आखिर किसने दी और छात्रों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक छात्रा का दुपट्टा खींचकर उसके साथ बदसलूकी की गई और छात्र-छात्राओं को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के झंडे लगे डंडों से पीटा गया। दूसरी ओर, छात्राओं पर हमला करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस छात्राओं को हिरासत में ले रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन पर चोट के निशान हैं और जिन बेटियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, उनके साथ सड़क पर बदसलूकी की गई। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया, “पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने, रोजगार और शिक्षा की मांग करने पर छात्रों को लाठी क्यों मिली? बेटियों की सुरक्षा के बजाय उनका दुपट्टा क्यों खींचा गया? छात्रों को झामुमो के झंडे लगे डंडों से क्यों पीटा गया?”

राफिया नाज़ ने कहा कि यह केवल अमीषा और सबिता का मामला नहीं, बल्कि झारखंड के हर छात्र और बेटी के सम्मान तथा भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि सत्ता की ताकत से आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन युवाओं के सवाल खत्म नहीं किए जा सकते।

राहुल गांधी के ‘गूंज’ कार्यक्रम पर निशाना साधते हुए राफिया नाज़ ने कहा कि यह कार्यक्रम कांग्रेस और राहुल गांधी के आत्मप्रचार का मंच बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में युवाओं की आवाज सुनना चाहती है, तो उसे उन छात्रों के बीच खड़ा होना चाहिए, जिनकी आवाज आज झारखंड की सड़कों पर उठ रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर ‘गूंज’ छात्रों के लिए है, तो झारखंड के छात्रों की पीड़ा राहुल गांधी तक क्यों नहीं पहुंच रही।

उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की बात मंच से करना आसान है, लेकिन उसकी असली परीक्षा युवाओं के अधिकारों पर चोट के समय होती है। राफिया नाज़ ने राहुल गांधी से सवाल किया, “झारखंड के छात्रों की आवाज आपको क्यों नहीं सुनाई देती? यदि ‘गूंज’ वास्तव में छात्रहित के लिए होती, तो उसमें राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रचार से अधिक झारखंड के छात्रों के दर्द, संघर्ष और अधिकारों की आवाज सुनाई देती।”------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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