बड़कागांव में खनन परियोजना की लोक सुनवाई 20 को : शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका

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बड़कागांव में खनन परियोजना की लोक सुनवाई 20 को : शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका


हजारीबाग, 17 जनवरी (हि.स.)। बड़कागांव (हजारीबाग)। गोंदुलपारा कोयला खनन परियोजना को लेकर 20 जनवरी को स्थानीय फुटबॉल मैदान में होने वाली लोक सुनवाई के दौरान शांति व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन सकती है। असामाजिक तत्वों की ओर से मारपीट या हिंसा की आशंका जताई जा रही है। इससे संबंधित कई वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किए गए हैं, जिसमें खुलेआम धमकी दी जा रही है। वीडियो में लोगों से हथियार उठाने की अपील की जा रही है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम कर लोक सुनवाई को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाया जाए, ताकि जनमत निर्भीक होकर सामने आ सके।

इलाके में अवैध चिमनी भट्ठों और अवैध कोयला गतिविधियों से जुड़े तत्वों के सक्रिय रहने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। लोक सुनवाई के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती, प्रवेश-निकास की नियंत्रित व्यवस्था और संवेदनशील बिंदुओं पर निगरानी जरूरी मानी जा रही है।

खनन से रोजगार और राजस्व, क्षेत्रीय विकास को मिलेगी रफ्तार

बड़कागांव में आवंटित कोल ब्लॉकों में खनन शुरू होने से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 5 से 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसमें स्थानीय दुकान, परिवहन, डंपर संचालन और सहायक सेवाएं शामिल हैं। यहां एनटीपीसी, एनएमडीसी, अदाणी और जेएसडब्ल्यू जैसी बड़ी कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटित हैं।

गोंदुलपारा परियोजना से राज्य को सालाना करीब 600 करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना जताई जा रही है, इसका उपयोग स्थानीय आधारभूत संरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य में किया जा सकेगा। साथ ही बढ़ती बिजली मांग के बीच देश को अब भी कोयला आयात करना पड़ता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से बिजली आपूर्ति सुदृढ़ होगी और अवैध कोयला तस्करी पर भी अंकुश लगेगा। लोक सुनवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर ही विकास से जुड़े तथ्यों पर सार्थक चर्चा संभव है। प्रशासन की सक्रियता और कानून-व्यवस्था की मजबूती से ही बड़कागांव के लिए रोजगार, राजस्व और ऊर्जा सुरक्षा जैसे लाभों का रास्ता प्रशस्त हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak

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