रामगढ़ महाविद्यालय में शोध विमर्श 'प्रमा' का आयोजन

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रामगढ़ महाविद्यालय में शोध विमर्श 'प्रमा' का आयोजन


रामगढ़ महाविद्यालय में शोध विमर्श 'प्रमा' का आयोजन


रामगढ़, 15 जुलाई (हि.स.)।

रामगढ़ महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में बुधवार को संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच शैक्षणिक सहयोग और परिसर में शोध संस्कृति विकसित करने के लिए बहुविषयक शोध विमर्श प्रमा की साप्ताहिक श्रृंखला का आयोजन किया गया। इस दौरान हिन्दी की विभागाध्यक्ष डॉ अनामिका ने सृजनशीलता के विविध आयाम विषय पर प्रस्तुति दी।

डॉ अनामिका ने सृजनशीलता के विविध आयाम विषय पर अपनी प्रस्तुति में कहा कि सृजनशीलता मौलिकता, रचनात्मकता और संवेदनशीलता से आकर ग्रहण करती हैं। पृथ्वी सृजनशील है। हमारे आसपास जो वातावरण और भाषा है वह लगातार नए ढंग से सृजित और गतिशील है। एक वेबसाइट बनाना भी उतना ही सृजनात्मक है जितना की कविता लिखना। कभी मनुष्य ने कल्पना की होगी कि हम पक्षियों की तरह उड़े तो उसने उड़ने की कारीगरी ईजाद की। उन्होंने कहा कि न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत, अब्दुल कलाम आजाद की वैज्ञानिकता हो, प्रेमचंद की कहानी सब सृजनशीलता के उदाहरण है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौलिकता का अर्थ किसी से प्रभावित होना नहीं है, बल्कि प्रभाव के बीच भी अपनी पहचान को स्थापित करना है। मौलिकता हमारे जीवन दृष्टि से आकार लेती है। वहीं, व्याख्यान सुनने के बाद महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ विमल कुमार मिश्रा ने कहा कि शोध बौद्धिक प्रगति और विकास का आधार है। यह केवल अज्ञात चीजों को ज्ञात करने का माध्यम नहीं, बल्कि समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की प्रक्रिया है। इसलिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को जिज्ञासा, नवाचार और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। शोध विमर्श पर आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम का परिचय एवं संचालन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति कमल ने किया।

मौके पर डॉ रत्ना पांडे, डॉ आर के उपाध्याय, डॉ बक्शी ओमप्रकाश, डॉ कामना राय, रोज उरांव, डॉ रामाज्ञा सिंह, डॉ मालिनी डीन, डॉ बलवंती मिंज, असीम खलखो, विजेता तिग्गा, डॉ राहुल कुमार, डॉ नीतू मिंज, साजिद हुसैन, डॉ शाहनवाज़ खान, प्रकाश वर्मा सहित छात्र-छात्राएं उपस्थिति थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

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