जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के पुतला दहन के बाद छात्रों पर पुलिस कस रही शिकंजा

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जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के पुतला दहन के बाद छात्रों पर पुलिस कस रही शिकंजा


जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के पुतला दहन के बाद छात्रों पर पुलिस कस रही शिकंजा


रांची, 22 अगस्त (हि.स.)।

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की ओर से 20 अगस्त 2026 को अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किए जाने के बाद पुलिस की ओर से आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं को एक-एक कर डिटेन किए जाने का मामला सामने आया है।

मंच से जुड़े छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस आंदोलन की आवाज को दबाने के लिए छात्र नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जा रही है।

शनिवार को छात्रा अमीषा प्रसाद को लालपुर स्थित एक लॉज से कोतवाली थाना पुलिस अपने साथ ले गई। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि रांची स्थित लॉज में महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है, बस कोतवाली थाना में कुछ पूछताछ करनी है। इसलिए उन्हें साथ चलना होगा। लेकिन जब नोटिस देने की बात कही गई तो पुलिस ने नम्र भाव से कहा, अरे चलो न बेटा, कुछ पूछताछ कर छोड़ देंगे। लेकिन दोपहर तीन-साढ़े तीन बजे से रात आठ बजे तक उन्हें थाने में ही बिठाकर रखा गया और इस दौरान थानेदार भी नहीं आईं।

इसी बीच नगर निगम अध्यक्ष रोशनी खलखो ने कोतवाली थाने में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह तानाशाही रवैया है। थाने में बिना नोटिस के किसी को बिठाना गलत है। कई बच्चों को जानबूझकर पुलिस उठाकर थाने ले जा रही है, यह निंदनीय है।

वहीं, पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान पुलिस से झड़प में घायल छात्र नेता कुणाल प्रताप सिंह को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें पारस अस्पताल लाया गया। छात्र-अभ्यर्थियों ने बताया कि सदर अस्पताल में भी छात्रों को उनसे मिलने से रोका गया। आरोप है कि छात्र प्रतिनिधियों को पारस अस्पताल में भी कुणाल प्रताप सिंह से मिलने नहीं दिया गया।

छात्रों के अनुसार, छात्र नेता पीयूष कुमार और रवींद्र पासवान को भी पुलिस पहले सदर अस्पताल लेकर गई थी। इसके बाद दोनों को कहां ले जाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। मंच के छात्र अभ्यर्थी उमेश प्रसाद ने कहा कि पुलिस छात्रों को अलग-अलग स्थानों पर रखकर पूछताछ कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी छात्र को नुकसान पहुंचा या आंदोलन की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया तो झारखंड भर के छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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