जागरूक नागरिक ही कर सकते हैं बच्चों के अधिकारों की रक्षा में : पीडीजे
रामगढ़, 12 जून (हि.स.)। विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाल श्रम एवं बाल तस्करी उन्मूलन विषय पर कार्यक्रम का आयोजन अग्रगति एनजीओ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मो तौफीकुल हसन ने की।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार, अग्रमति परियोजना के प्रभारी किरण शंकर दत्ता, परियोजना के अन्य सदस्य, एलएडीसीएस के सदस्य सहित अन्य लोग मौजूद थेे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी न केवल बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाती है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन करती है। अग्रगति एनजीओ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें शोषण से मुक्त रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो तौफीकुल हसन ने कहा कि बाल श्रम और बाल तस्करी के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बाल तस्करी का मामला सामने आए तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभागों एवं प्राधिकरणों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। समाज को इस दिशा में संवेदनशील बनने की आवश्यकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार ने उपस्थित लोगों को प्राधिकरण की ओर से संचालित निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए डीएलएसए सदैव तत्पर रहता है। साथ ही बच्चों के संरक्षण एवं उनके अधिकारों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मौजूद एलएडीसीएस के सदस्यों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने भी बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

