झारखंड में अस्थायी गर्भनिरोधक विधियों को मिल रहा बढ़ावा
रांची, 20 अप्रैल (हि.स.)।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), झारखंड के अंतर्गत संचालित परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत सोमवार को राज्य में सुरक्षित, प्रभावी एवं सुलभ अस्थायी गर्भनिरोधक सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाना एवं परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देना है।
यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड की ओर से सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दी।
विज्ञप्ति में बताया गया कि कार्यक्रम के तहत लोगों को विशेष रूप से तीन प्रमुख अस्थायी विधियों पोस्टपार्टम इंट्रोटेरीन कांट्रासेप्टिव डिवाईस (पीपीआईयूसीडी), पोस्ट अ्बॉर्सन इंट्रोटेरीन कांट्रासेप्टिव डिवाईस (पीएआईयूसीडी) और इंट्रोटेरीन कांट्रासेप्टिव डिवाईस (आईयूसीडी) को अपनाकर स्वस्थ और सशक्त परिवार निर्माण में सहयोग करने की अपील की गई।
बताया गया कि उक्त सभी प्रमुख अस्थायी विधियों को लागू किया जा रहा है, जो सुरक्षित है। जानकारी दी गई कि पीपीआईयूसीडी प्रसव के 48 घंटे के भीतर अपनाई जाने वाली सुरक्षित और दीर्घकालिक विधि है, जबकि पीएआईयूसीडी गर्भपात के तुरंत बाद उपयोगी साबित होती है। आईयूसीडी एक दीर्घकालिक गर्भनिरोधक उपाय है, जो 5 से 10 वर्षों तक प्रभावी रहता है। एनएचएम के अनुसार, इन सेवाओं को राज्य के सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराया गया है। प्रशिक्षित डॉक्टरों और एएनएम महिलाओं को परामर्श दे रहे हैं। साथ ही सहिया कार्यकर्ताओं के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

