आदिवासी समाज के संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक थे दिशोम गुरु: शिल्पी नेहा तिर्की

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आदिवासी समाज के संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक थे दिशोम गुरु: शिल्पी नेहा तिर्की


आदिवासी समाज के संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक थे दिशोम गुरु: शिल्पी नेहा तिर्की


-दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अर्पित की श्रद्धांजलि

रांची, 11 जनवरी (हि.स.)। झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जयंती के अवसर पर रविवार को उन्हें शत-शत नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने दिशोम गुरु के योगदान को याद करते हुए उन्हें देश की राजनीति का एक अमिट नाम बताया।

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि देश की राजनीति में कुछ ऐसे महान पुरोधा हुए हैं, जिनका नाम और योगदान सदैव अजय-अमर रहेगा। उन्हीं में से एक दिशोम गुरु शिबू सोरेन हैं। उन्होंने कहा कि दिवंगत शिबू सोरेन हम सभी के दिशोम गुरु थे और वे हमेशा दिशोम गुरु ही रहेंगे। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

मंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज के संघर्ष, त्याग और सशक्त नेतृत्व की जीवंत मिसाल थे। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और आदर्शों से समझौता नहीं किया। उनकी विचारधारा और संघर्षशील जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के अधिकार, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने आदिवासी समाज को अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया और बच्चों को शिक्षा के महत्व को समझने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने अन्याय और शोषण के खिलाफ उलगुलान का रास्ता दिखाया और समाज को सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर एक मजबूत, संगठित और जागरूक समाज के निर्माण का संदेश दिया।

मंत्री ने कहा कि आज भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचार और संघर्ष झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रासंगिक हैं। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही समाज में समानता, न्याय और सम्मान की भावना को मजबूत किया जा सकता है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

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