जतरा आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक : मंत्री
रांची, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मांडर में 40 पड़हा मुड़मा जतरा की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की शामिल हुए। बैठक में आगामी 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस जतरा के आयोजन, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता व्यवस्था सहित अन्य मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। साथ ही कई मुद्दों पर रणनीति बनाई गई।
इस अवसर पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि 40 पड़हा मुड़मा जतरा आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उरांव और मुंडा समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक मिलन स्थल के रूप में इसकी विशिष्ट पहचान है। राजकीय जतरा का दर्जा प्राप्त इस आयोजन में देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा कि आयोजन को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन, जतरा समिति और स्थानीय लोगों के समन्वय से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जाएंगी। आगामी दिनों में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा भी की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि जतरा की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसकी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भव्य बनाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
बैठक में अंचलाधिकारी चंचला कुमारी, खलारी के डीएसपी, चान्हो के प्रखंड विकास पदाधिकारी, जतरा समिति के अध्यक्ष, पड़हा प्रतिनिधि और सभी 40 पड़हा के ग्रामीण मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

