प्रेमचंद जयंती पर मेकॉन में हिंदी संगोष्ठी, विजेताओं को किया सम्मानित
रांची, 04 अगस्त (हि.स.)। मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर मेकॉन, रांची में मंगलवार को हिंदी संगोष्ठी सह प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मेकॉन के कार्यपालक निदेशक (वाणिज्यिक) विनय कुमार झा ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज और जीवन का सशक्त दस्तावेज है। उनकी रचनाओं में किसान, श्रमिक, महिलाओं और वंचित वर्गों के संघर्ष, स्वाभिमान, सामाजिक न्याय तथा राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का जीवंत चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं और वर्तमान समाज को नई दिशा देने में सक्षम हैं।
संगोष्ठी के दौरान प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों 'पंच परमेश्वर', 'ईदगाह', 'कफन', 'पूस की रात', 'दो बैलों की कथा', 'बूढ़ी काकी', 'नमक का दरोगा' और 'अलग्योझा' पर आधारित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने इन रचनाओं में निहित सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (लौह निर्माण) एवं प्रभारी राजभाषा विश्वजीत कुमार सहित मेकॉन, नराकास (उपक्रम) रांची के सदस्य कार्यालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

